
स्लोवियांस्क पर रूस का ताबड़तोड़ हमला, एक के बाद गिराए 9 बम, 8 लोग घायल
AajTak
पूर्वी यूक्रेन के स्लोवियांस्क शहर पर रूस ने एक ही दिन में नौ एरियल बम गिराए, जिसमें दो बच्चों सहित आठ लोग घायल हुए. एक बम आवासीय इमारत पर गिरा, जिससे बड़ा हिस्सा ढह गया. गवर्नर वादीम फिलाश्किन ने चेतावनी दी कि डोनेट्स्क में अब कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है और लोगों से तुरंत निकासी की अपील की.
रूस ने बुधवार को यूक्रेन के पूर्वी शहर स्लोवियांस्क पर भारी हवाई हमला किया, जिसमें 9 एरियल बम गिराए गए. इस भीषण हमले में कम से कम आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं. क्षेत्रीय गवर्नर वादीम फिलाश्किन ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि शहर में हालात गंभीर हैं और नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की आवश्यकता है.
हमले में सबसे बड़ा नुकसान उस समय हुई जब एक एरियल बम सीधा एक आवासीय इमारत पर गिरा. धमाका इतना तेज था कि इमारत का बड़ा हिस्सा ढह गया और आसपास के घरों की खिड़कियां और दरवाजे चकनाचूर हो गए. रात भर रेस्क्यू टीम मौके पर मौजूद रही और मलबे में फंसे लोगों को निकाला.
यह भी पढ़ें: गाजा के बाद यूक्रेन पर आया ट्रंप का 28 सूत्रीय प्लान, क्यों रूस को खुली छूट देता दिख रहा है प्रस्ताव?
घायलों में शामिल एक 61 वर्षीय महिला ने बताया कि विस्फोट के बाद कांच के टुकड़े उनके चेहरे पर जा लगे. वहीं, 64 वर्षीय एक पुरुष ने रोते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में दूसरी बार घर खोया है. उन्होंने बताया कि इससे पहले 1988 में अर्मेनिया में आए विनाशकारी भूकंप में भी उनका घर तबाह हो गया था. अब युद्ध ने उनकी जिंदगी को फिर से उजाड़ दिया.
गवर्नर फिलाश्किन ने अपने संदेश में कहा कि डोनेट्स्क क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और "अब यहां कोई भी सुरक्षित स्थान नहीं बचा है." उन्होंने लोगों से अपील की कि वे तुरंत क्षेत्र खाली करें, क्योंकि रूस की बमबारी किसी भी समय और कहीं भी हो सकती है.
यह भी पढ़ें: ट्रंप के दूतों संग पुतिन की 5 घंटे क्लोज-डोर मीटिंग, यूक्रेन पीस प्लान पर चर्चा, ट्रंप बोले- जंग खत्म करना आसान नहीं

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?









