
'स्टेच्यू ऑफ यूनियन' कहलाएगी टेक्सास की हनुमान प्रतिमा... जानिए क्या है रामायण से कनेक्शन
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भगवान हनुमान की इस विशाल मूर्ति का निर्माण भारतीय वास्तुकला के अद्भुत नमूने के रूप में किया गया है. मूर्ति में भगवान हनुमान की शक्तिशाली और करुणामयी छवि नजर आती है. गदा धारण की हुई उनकी यह मूर्ति 90 फीट ऊंची है, जिससे यह धार्मिक महत्व का प्रतीक तो है ही साथ ही वास्तुकला और इंजीनियरिंग का भी उदाहरण भी है.
अमेरिका में बजरंजबली का जयकारा गूंज रहा है. वजह है टेक्सास के ह्यूस्टन में भव्य और ऊंची हनुमान प्रतिमा के अनावरण. सामने आया है कि 15 अगस्त से 18 अगस्त तक चले तीन दिन के समारोह के साथ श्रीराम दूत पवनसुत हनुमान जी की 90 फुट ऊंची प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई है. यह अमेरिका में तीसरी सबसे ऊंची मूर्ति है. प्राण प्रतिष्ठा समारोह बीते रविवार (18 अगस्त) को आयोजित किया गया था. यहां स्थापित हनुमानजी का प्रतिमा का नाम 'स्टेच्यू ऑफ यूनियन' दिया गया है.
हनुमान जी की प्रतिमा के नामकरण का 'रामायण' कनेक्शन प्रतिमा को 'स्टेच्यू ऑफ यूनियन' नाम दिए जाने की एक बड़ी वजह है. इस वजह के तार रामायण की पौराणिक कथा एक प्रसंग से जुड़ते हैं. असल में जब रावण श्रीराम की पत्नी सीता को उनका अपहरण करके लंका ले गया था, तब हनुमान जी ही ने सागर पारकर सीता माता का पता लगाया था. उन्होंने श्रीराम और माता सीता का फिर से मिलन कराया था, इसलिए ही उनकी इस प्रतिमा को स्टेच्यू ऑफ यूनियन का नाम दिया गया है.
वह हनुमान जी ही थे, जिन्होंने श्रीराम की मित्रता सुग्रीव से कराई थी. सुग्रीव वानर राज थे, लेकिन पारिवारिक कलह के कारण ऋष्यमूक पर्वत पर निर्वासित जीवन जी रहे थे. हनुमान जी ने श्रीराम को सुग्रीव से मिलवाया था और दोनों ने एक-दूसरे की सहायता का वचन दिया था. टेक्सास राज्य में बजरंगबली हनुमानजी की 90 फीट ऊंची भव्य मूर्ति स्थापित होने से भारतीय समुदाय में गर्व और खुशी का आलम है. यह मूर्ति अमेरिका में स्थापित धार्मिक मूर्तियों में से एक सबसे ऊंची मूर्तियों में शामिल हो गई है. इससे ऊंची केवल स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और पेगासस की ड्रैगन की मूर्तियाँ ही हैं, जो अमेरिकी इतिहास और संस्कृति के प्रतीक मानी जाती हैं.
शक्ति और करुणा की प्रतीक है मूर्ति भगवान हनुमान की इस विशाल मूर्ति का निर्माण भारतीय वास्तुकला के अद्भुत नमूने के रूप में किया गया है. मूर्ति में भगवान हनुमान की शक्तिशाली और करुणामयी छवि नजर आती है. गदा धारण की हुई उनकी यह मूर्ति 90 फीट ऊंची है, जिससे यह धार्मिक महत्व का प्रतीक तो है ही साथ ही वास्तुकला और इंजीनियरिंग का भी उदाहरण भी है.
मूर्ति की निर्माण प्रक्रिया में कई महीनों का समय लगा. और इसमें बड़ी संख्या में श्रमिकों और विशेषज्ञों की मेहनत शामिल थी. हनुमान प्रतिमा का नामकरण ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ के रूप में किया गया है. जानकारी के मुताबिक, टेक्सास के सुगर लैंड नामके शहर में श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में विशाल बजरंगबली की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई है. हनुमान प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा का श्रेय चिन्नाजीयर स्वामीजी को दिया जा रहा है.
स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और पेगासस-ड्रैगन के साथ हो रही तुलना अमेरिका के टेक्सास में स्थापित भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति ने न केवल भारतीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है, बल्कि इसे अमेरिका की अन्य प्रसिद्ध मूर्तियों जैसे स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और पेगासस-ड्रैगन के साथ भी तुलना की जा रही है.

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