
सोनिया ने संन्यास लिया तो 2024 में क्या होगा? यूपी में कांग्रेस का आखिरी दुर्ग बचाने कौन उतरेगा?
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कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के सक्रिय राजनीति से संन्यास की अटकलें लगाई जा रही हैं. अटकलों के बीच ये चर्चा भी शुरू हो गई है कि अगर सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति से संन्यास लिया तो 2024 के लोकसभा चुनाव में क्या होगा? यूपी में कांग्रेस का अंतिम दुर्ग बचाने के लिए कौन उतरेगा?
दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है. वही यूपी जो देश की सत्ता पर लंबे समय तक राज करने वाली कांग्रेस पार्टी का कभी गढ़ हुआ करता था. आज उसी यूपी में पार्टी अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही है. 2024 के आम चुनाव में कांग्रेस देश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को चुनौती देने की तैयारी में जुटी है लेकिन कांग्रेस के सामने अब यूपी का आखिरी दुर्ग बचाने की चुनौती आ खड़ी हुई है.
यूपी में कांग्रेस का आखिरी दुर्ग यानी रायबरेली लोकसभा सीट. यूपी की ये एकमात्र लोकसभा सीट है जो अभी कांग्रेस के कब्जे में है. कभी यूपी की सियासत का सिरमौर रही कांग्रेस पार्टी 2019 के चुनाव में केवल एक रायबरेली सीट पर सिमटकर रह गई. पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी जब अमेठी सीट से चुनाव हार गए, तब भी रायबरेली की जनता ने कांग्रेस पार्टी पर भरोसा किया और सोनिया गांधी को जीताकर संसद में भेजा.
कांग्रेस की मुश्किल ये है कि अगर सोनिया गांधी ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लिया, रायपुर अधिवेशन में सोनिया गांधी के संबोधन के बाद जैसे कि कयास भी लगाए जा रहे हैं. तो यूपी में कांग्रेस का ये आखिरी दुर्ग बचाने की जिम्मेदारी किसे दी जाए, किसके चेहरे पर भरोसा किया जाए, कैसे चुनावी नैया पार लगाई जाए. सोनिया गांधी के सक्रिय राजनीति से संन्यास की अटकलों को हालांकि कुमारी शैलजा ने खारिज करते हुए कहा है कि उनका संबोधन कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल को लेकर था.
क्यों शुरू हुए सोनिया के संन्यास के कयास
दरअसल, सोनिया गांधी ने रायपुर में कांग्रेस के अधिवेशन में सोनिया गांधी ने भावुक भाषण दिया और अपने संबोधन के दौरान 1998 में कांग्रेस पार्टी की कमान संभालने से लेकर अब तक के सफर की उपलब्धियां गिनाईं. सोनिया गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा की तारीफ करते हुए ये कह दिया कि मेरी पारी भारत जोड़ो यात्रा के साथ समाप्त हो सकती है जो कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है. सोनिया के इसी बयान को लेकर उनके संन्यास के कयास लगाए जाने लगे.
सोनिया गांधी नहीं तो कौन

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