
सेफ्टी में मिला 1 स्टार...यहां बंद हुई FRONX की बिक्री! एजेंसी ने दी पीछे न बैठने की सलाह
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NZTA ने देश में चल रही 1,115 सुजुकी फ्रॉन्क्स गाड़ियों के मालिकों को आधिकारिक चेतावनी जारी की है. एजेंसी ने साफ कहा है कि पीछे की सीटों का इस्तेमाल न किया जाए. भारत में बनी इस एसयूवी को हाल ही में ANCAP द्वारा क्रैश टेस्ट के बाद 1 स्टार सेफ्टी रेटिंग दी गई थी.
Suzuki Fronx Safety Rating: जिस कार को स्टाइल और किफायती कीमत का पैकेज माना जा रहा था, वही अब सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है. सुजुकी फ्रॉन्क्स, जिसने लॉन्च के बाद कई बाजारों में ध्यान खींचा, अब ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में एक बड़े सेफ्टी विवाद के चलते सुर्खियों में है. क्रैश टेस्ट के नतीजों ने ऐसा झटका दिया कि कंपनी को बिक्री तक रोकनी पड़ी और ग्राहकों को पीछे सीट पर यात्रियों को न बैठाने की सलाह देनी पड़ी है.
दरअसल, ऑस्ट्रेलेशियन न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (ANCAP) ने हाल ही में सुजुकी फ्रॉन्क्स का सेफ्टी टेस्ट किया था. जिसमें इस एसयूवी को सिर्फ एक-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली. रिपोर्ट सामने आते ही सुजुकी न्यूज़ीलैंड ने इस कार की बिक्री रोक दी है. इसके साथ ही कंपनी ने मौजूदा ग्राहकों को चेतावनी दी है कि वे पीछे की सीट पर किसी भी यात्री को न बैठाएं, क्योंकि टेस्ट के दौरान सीटबेल्ट से जुड़ी गंभीर खामी पाई गई है.
न्यूज़ीलैंड ट्रांसपोर्ट एजेंसी वाका कोताही (NZTA) ने देश में चल रही 1,115 सुजुकी फ्रॉन्क्स गाड़ियों के मालिकों को आधिकारिक चेतावनी जारी की है. एजेंसी ने साफ कहा है कि पीछे की सीटों का इस्तेमाल न किया जाए. ANCAP क्रैश टेस्ट में पाया गया कि पीछे की सेफ्टी बेल्ट का मैकेनिज्म ठीक से काम नहीं कर रहा था, जिससे दुर्घटना की स्थिति में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.
ANCAP के अनुसार फ्रॉन्क्स मुश्किल से सिंगल स्टार रेटिंग हासिल कर सकी है. टेस्ट के दौरान एक गंभीर और अलग तरह की सेफ्टी समस्या सामने आई, जब पीछे की सीट की सीटबेल्ट रिट्रैक्टर फेल हो गया. इस वजह से रियर सीट पर बैठी डमी अनियंत्रित हो गई और सीधे आगे की सीट से टकरा गई, जिसे बेहद गंभीर सुरक्षा चूक माना गया.
क्रैश टेस्ट के नतीजों में फ्रॉन्क्स को एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन में 48 प्रतिशत प्वाइंट मिले. चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन का स्कोर सिर्फ 40 प्रतिशत रहा. वल्नरेबल रोड यूजर प्रोटेक्शन में इसे 65 प्रतिशत और सेफ्टी असिस्ट में 55 प्रतिशत अंक दिए गए. ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि कार की ओवरऑल सेफ्टी परफॉर्मेंस उम्मीद से काफी कमजोर रही.
चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन में कम स्कोर की बड़ी वजह पीछे की सीटों पर सीटबेल्ट प्रीटेंशनर का न होना है. ANCAP ने बताया कि फ्रंटल और साइड इम्पैक्ट टेस्ट में बच्चों की डमी ठीक से सुरक्षित नहीं रहीं. बच्चों के सिर और छाती की सुरक्षा को कमजोर से औसत स्तर का आंका गया, जिससे अलग-अलग टेस्ट में स्कोर और गिर गया. हालांकि पीछे की सीटों पर ISOFIX एंकरेज और टॉप टेथर पॉइंट मौजूद हैं, लेकिन सीटबेल्ट प्रीटेंशनर और चाइल्ड प्रेजेंस डिटेक्शन सिस्टम की कमी ने रेटिंग को और नुकसान पहुंचाया.

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