
'सेक्यूलरिज्म' के बोझ तले दबे खड़गे रजाकारों की ज्यादती पर चुप रहने पर मजबूर? | Opinion
AajTak
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को संसद से सड़क तक बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रामक देखा जाता रहा है. चुनावी रैलियों में वो मोदी और योगी के नये नारों पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन क्या ये वास्तव में उनके मन की बात है, या राजनीतिक मजबूरी - सोशल मीडिया पर यही बहस चल रही है.
मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान उनकी आपबीती से मेल नहीं खाते. जब 'रजाकारों और इत्तेहाद ने जुल्म की इंतेहा कर दी...', बड़े बेमन से वो खामोशी अख्तियार कर लेते हैं, और यही वजह है कि मल्लिकार्जुन खड़गे की राजनीति और बचपन से उनके अंतर्मन पर जमे जख्मों में सामंजस्य न होने को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाये जा रहे हैं.
दुनिया के ज्यादातर काम दिल लगाकर किये जा सकते हैं, सिवाय सियासत के. क्योंकि सियासत में दिमाग का ही इस्तेमाल होता है, दिल का नहीं. और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को ऐसी मिसाल के तौर पर देखा जा सकता है. दिल से राजनीति करने वालों का हाल क्या होता है, कहने की जरूरत नहीं है. क्योंकि, राजनीति तो दिल पर पत्थर रखकर ही की जाती है - तो क्या वास्तव में मल्लिकार्जुन खड़गे दिल पर पत्थर रखकर ही राजनीति करते रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नये नारों को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे चुनावी रैलियों में सवाल उठा रहे हैं. लेकिन, उनके एक भाषण पर सोशल मीडिया पर बहस चल रही है - ऐसा क्यों लगता है, जैसे मोदी-योगी के नारों पर भड़क जाने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे, अपनी भड़ास भी नहीं निकाल पा रहे हैं?
आखिर ये राजनीतिक मजबूरी नहीं तो क्या है? क्या विचारधारा के दबाव में मल्लिकार्जुन खड़गे कुर्बानी दे रहे हैं?
रूह कंपा देने वाला वो मंजर, और एक लंबी खामोशी
ये वो वाकया है, जब पूरे परिवार को जलाकर मार डाला गया था, और सिर्फ मल्लिकार्जुन खड़गे बच पाये थे. देश के स्वतंत्रत होने के साल भर बाद, यानी 1948 में हैदराबाद राज्य को आजादी मिलने से पहले, भयंकर हिंसक घटनाएं हुई थीं. मल्लिकार्जुन खड़गे तब 5 साल से थोड़ा ज्यादा के रहे होंगे - और उस वक्त जो कुछ भी मल्लिकार्जुन खड़गे की आंखों के सामने घटा, वो खुद क्या, कोई भी ताउम्र नहीं भूल सकता.

ग्रेटर नोएडा में कोहरे के कारण पानी से भरे बेसमेंट में गिरी कार हादसे में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई. मौके पर मौजूद डिलिवरी ब्वॉय ने रस्सी बांधकर पानी में उतरकर बचाने की कोशिश की. लेकिन युवराज को बचाया नहीं जा सका. नोएडा के इंजीनियर युवराज की मौत के बाद डिलिवरी ब्वॉय को क्यों धमका रही पुलिस?

ट्रंप की ईरान को दी गई उस धमकी के बारे में बताएंगे जिसमें उन्होंने कहा कि कि ईरान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा. उनका ये बयान उस संदर्भ में आया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ईरान ट्रंप की हत्या कर सकता है. इस पर ट्रंप ने कहा अगर उन्हें कुछ भी हुआ तो अमेरिका की सेनाएं ईरान को धरती के नक्शे से मिटा देंगी. आज इस बात का विश्लेषण करेंगे कि क्या वाकई ईरान ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा है?

मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर विवाद गहराया है. अविमुक्तेश्वरानंद सरकार पर कड़े तेवर दिखा रहे हैं. उन पर शंकराचार्य के अपमान का आरोप लगा है. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर बैठकर अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान करने से प्रशासन ने रोक लगा दी. समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.









