
Noida Engineer Death: इंजीनियर की मौत, लापरवाही और अफसरों से पूछताछ... हादसे की परतें खोलने में जुटी SIT
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Noida Engineer Death Case: नोएडा इंजीनियर डेथ केस ने पूरे एनसीआर में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. एक सड़क हादसे के तौर पर सामने आई यह घटना अब गहराते शक और जिम्मेदारियों की जांच का मामला बन चुकी है. इसी कड़ी में गठित एसआईटी (Special Investigation Team) ने मामले से जुड़े हर व्यक्ति के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. जिसके तहत प्राधिकरण से जुड़े संबंधित अफसरों से भी सवाल जवाब किए जा रहे हैं.
जांच का मकसद सिर्फ यह जानना नहीं है कि हादसा कैसे हुआ, बल्कि यह भी पता करना है कि कौन सी लापरवाही ने एक इंजीनियर की जान ले ली. सही कहा जाए तो यह कहानी अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों की पड़ताल बन चुकी है.
SIT दर्ज कर रही है बयान एसआईटी इस केस को कई कोणों से देख रही है. टीम उन सभी लोगों के बयान दर्ज कर रही है, जो किसी न किसी रूप में इस मामले से जुड़े रहे हैं. चाहे वह घटनास्थल से जुड़े लोग हों या फिर प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी. जांच अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह हादसा टाला जा सकता था. इसी वजह से जांच की सुई अब सिर्फ ट्रक और कार तक सीमित नहीं, बल्कि फैसलों और फाइलों तक पहुंच चुकी है.
प्राधिकरण के अधिकारियों से भी सवाल जांच में उन ऑथोरिटी अधिकारियों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, जिनकी जिम्मेदारी उस इलाके की देखरेख की थी. एसआईटी यह जानना चाहती है कि सड़क, ट्रैफिक और सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन हुआ या नहीं. जिन अधिकारियों पर निगरानी और सुधार की जिम्मेदारी थी, उनसे सीधे सवाल पूछे जा रहे हैं. फिक्शन अंदाज में कहें तो अब फाइलों के पन्ने भी गवाह बनते नजर आ रहे हैं.
चेतावनी अनसुनी तो नहीं? एसआईटी उन अधिकारियों के बयान भी रिकॉर्ड कर रही है, जिन पर काम से जुड़े पत्रों का जवाब देने की जिम्मेदारी थी. बताया जा रहा है कि पहले भी इलाके में खामियों को लेकर पत्र लिखे गए थे. सवाल यह है कि क्या उन पत्रों को गंभीरता से लिया गया या फाइलों में दबा दिया गया. जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि क्या समय रहते कार्रवाई होती तो इंजीनियर की जान बच सकती थी.
बीट पुलिस की भूमिका भी रडार पर इलाके की बीट पुलिस भी अब जांच के दायरे में है. एसआईटी बीट पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर उनकी क्या भूमिका रही. क्या हादसे से पहले किसी खतरे की सूचना थी, और अगर थी तो उस पर क्या कार्रवाई हुई. यह जांच अब सिस्टम के हर छोटे-बड़े पहरेदार से जवाब मांग रही है.

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