सूर्यकुमार यादव के लिए 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं न्यूजीलैंड सीरीज, बयानों से नहीं बल्ले से देना होगा जवाब
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सूर्यकुमार यादव लगातार कह रहे हैं कि वह फॉर्म से बाहर नहीं हैं, बस रन नहीं बन रहे. लेकिन उनके टी20I आंकड़े अब चिंता बढ़ा रहे हैं. कप्तान के तौर पर भारत जीत रहा है, जिससे उन्हें समय मिला है, लेकिन शब्दों और प्रदर्शन के बीच बढ़ती दूरी दबाव पैदा कर रही है. वर्ल्ड कप से पहले न्यूज़ीलैंड के खिलाफ आखिरी सीरीज़ उनके लिए निर्णायक होगी.
'फॉर्म से बाहर नहीं हूं, बस रन नहीं बन रहे.'
यह वह लाइन है, जिस पर सूर्यकुमार यादव पिछले कुछ महीनों से बार-बार भरोसा जताते रहे हैं. मानो इसे ज़ोर से कहने से उनके पैरों के नीचे की ज़मीन स्थिर हो जाएगी. उन्होंने पहली बार यह बात सितंबर में एशिया कप की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही थी, जब बातचीत का रुख पहले ही बदलने लगा था. इसके बाद उन्होंने धर्मशाला में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे टी20I के बाद भी यही दोहराया. हर बार संदेश एक जैसा और थोड़ी राहत देने वाला था. मेहनत सही है, इरादा नहीं बदला है और रन अपने समय पर आ जाएंगे.
पहले सूर्या ने कहा, 'मैं नेट्स में बहुत अच्छी बल्लेबाज़ी कर रहा हूं. जो मेरे नियंत्रण में है, वह सब कर रहा हूं.' फिर उन्होंने कहा, 'जब रन आने होंगे, तो ज़रूर आएंगे. मैं फॉर्म से बाहर नहीं हूं, लेकिन रन नहीं बन रहे हैं.' आखिरकार रविवार को उनका लहजा और तीखा हो गया. जब उन्होंने कहा, 'मेरे 14 सैनिक फिलहाल मुझे कवर कर रहे हैं. उन्हें पता है, जिस दिन मैं फट पड़ा, क्या होगा.'
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यह बात आत्मविश्वास से भरी होनी चाहिए थी. लेकिन इसके बजाय यह बेचैन करने वाली लगी, क्योंकि आंकड़े अब बहुत तेज़ आवाज़ में बोलने लगे हैं.
सूर्या के टी20I आंकड़े चिंताजनक

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