
सिलेबस में रामायण और महाभारत का पाठ सजेस्ट करने वाले इसाक से NCERT ने पल्ला झाड़ा!
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सीआई इसाक ने बताया था कि NCERT के सिलेबस में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों को शामिल किया जा सकता है. NCERT के निदेशक ने कहा कि सीआई इसाक न तो टेक्स्टबुक और न ही सिलेबस कमेटी का हिस्सा हैं.
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के सिलेबस में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों को शामिल करने की बात पर एनसीईआरटी के निदेशक ने भी अपना पक्ष रखा है. NCERT के निदेशक ने कहा कि सीआई इसाक न तो टेक्स्टबुक और न ही सिलेबस कमेटी का हिस्सा हैं. व्यक्त किए गए विचार उनके अपने विचार हैं. एनसीईआरटी का इससे कोई लेना देना नहीं है.
दरअसल, सीआई इसाक ने बताया था कि NCERT के सिलेबस में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों को शामिल किया जा सकता है. उन्होंने सोशल साइंस के पाठ्यक्रम में रामायण और महाभारत जैसे आख्यानों को एकीकृत करने से छात्रों के प्रारंभिक किशोरावस्था के दौरान उनके आत्म-सम्मान, देशभक्ति और अपने राष्ट्र के प्रति गौरव को बढ़ावा मिल सकता है. उन्होंने देशभक्ति की कथित कमी के कारण विदेश में नागरिकता चाहने वाले कई छात्रों के प्रस्थान का हवाला देते हुए छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपने देश और संस्कृति के प्रति प्रेम पैदा करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला.
इंडिया टुडे ने नए एकेडमिक सेशन के लिए इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में शास्त्रीय इतिहास काल में जोड़े जा रहे रामायण और भगवान राम की यात्रा पर एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी से विशेष रूप से बात की. उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने वाली ये समितियां अगले शैक्षणिक वर्ष के लिए पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही हैं. यह एक सतत प्रक्रिया है. नई पाठ्यपुस्तकें 2024 में अगले एकेडमिक सेशन से पहले प्रकाशित की जाएंगी.
निदेशक ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि सीआई इसाक खुद के सामाजिक विज्ञान समिति का हिस्सा होने का दावा करते हैं, उन्होंने कुछ साल पहले अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं. तब से एनसीईआरटी ने पाठ्यपुस्तकों और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे (NCF) पर एक विशेष 19 सदस्यीय समिति का गठन किया है. इसाक इनमें से किसी में भी शामिल नहीं हैं.
विशेष 19 सदस्यीय समिति के सदस्यों के नाम
बता दें कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 पहले ही लागू किया जा चुकी है और एनसीएफ (न्यू करीकुलम फ्रेमवर्क) लागू किया जा रहा है. एनसीईआरटी संभवतः 2024 की शुरुआत तक स्कूलों के लिए सीबीएसई पाठ्यपुस्तकों के पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दे देगा, नई प्रिंटिड किताबें अगले एकेडमिक सेशन से पहले अप्रैल-मई तक उपलब्ध कराई जाएंगी. इस बदलाव के लिए एक 19 सदस्यीय समिति नेशनल सिलेबस एंड टीचिंग लर्निंग मैटेरियल कमेटी (NSTC)) नाम दिया गया है. ये स्कूल के पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों, शिक्षण सामग्री और सीखने के संसाधनों को नेशनल करीकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) की तर्ज पर तैयार कर रही है. समिति के कार्यक्षेत्र में कक्षा 3 से 12 तक शामिल हैं, और इसका उद्देश्य कक्षा 1 और 2 से बाद की कक्षाओं में निर्बाध परिवर्तन सुनिश्चित करना भी है.

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