
सऊदी अरब पर क्यों आगबबूला हुआ अमेरिका, सांसदों ने दी अंजाम भुगतने की धमकी
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पिछले ही सप्ताह तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस ने तेल का उत्पादन कम करने का निर्णय लिया था. ओपेक प्लस समूहों में सऊदी अरब का दबदबा माना जाता है. इसलिए इस निर्णय के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को मनाने के लिए सऊदी अरब का दौरा भी किया था.
तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस ने 5 अक्टूबर को तेल उत्पादन में कटौती का ऐलान किया जिससे अमेरिका बेहद खफा है. ओपेक प्लस समूह में सऊदी अरब का दबदबा है और रूस भी इसका सदस्य देश है. अमेरिकी सरकार लगातार सऊदी अरब को तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए मनाने में जुटी हुई थी लेकिन सऊदी अरब ने इसे अनसुना कर दिया.
ओपेक प्लस ने कहा है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण, चीन में बढ़ रहे कोविड-19 महामारी और अन्य कुछ वजहों से वैश्विक बाजार उथल-पुथल है, इसलिए तेल के अंतरराष्ट्रीय कीमतों को बनाए रखने के लिए तेल उत्पादन में कटौती जरूरी है. इस निर्णय के तहत ओपेक प्लस देश 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन में कटौती करेंगे. इससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमत में तेजी आएगी.
क्या कहा अमेरिका ने
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सऊदी अरब का दौरा भी किया था. इसका एक मकसद सऊदी अरब से सप्लाई हो रहे घरेलू गैस की कीमत को मध्यावधि से पहले कम करना भी था. लेकिन सऊदी के मंत्री ने कहा कि तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत को बनाए रखने के लिए यह कटौती जरूरी थी. इस कदम को किसी देश के हित या अहित के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ओपेक प्लस द्वारा तेल कटौती के कदम से वह नाखुश हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब का उनका दौरा निराशाजनक रहा.
अमेरिकी सांसदों की चेतावनी अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने रविवार को कहा कि यह स्पष्ट है कि सऊदी अरब से हमें उतना सहयोग नहीं मिला, जितना हमें चाहिए था. इसलिए हमें भी सऊदी के साथ संबंधो के बारे में सोचना होगा. मर्फी ने कहा कि डेमोक्रेटस के अन्य सदस्य भी इस पक्ष में हैं कि गल्फ कंट्री (खाड़ी देशों) के साथ संबंधों पर पुनर्विचार करना चाहिए. अमेरिका के तीन अन्य डेमोक्रेटिक नेता ने संयुक्त बयान में कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिका खाड़ी देशों के साथ संबंध में सुपरपावर की भूमिका में आए. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब उन्होंने उस विकल्प को चुना है तो उसके नतीजों के लिए भी उन्हें तैयार रहना चाहिए.
रूस की मदद करना सऊदी अरब का मकसद अमेरिकी सिनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि जब पूरे विश्व में चिप की कमी थी, तब सऊदी अरब ने अमेरिका की मदद करने के बजाय रूस का साथ दिया था. अब सऊदी अरब तेल की कीमतों में बढ़ोतरी कर रूस की मदद कर रहा है. सऊदी अरब का रूस का यह समर्थन हमारे यूक्रेन गठबंधन को कमजोर करने की कोशिश है. सऊदी अरब को इसका अंजाम भुगतना होगा.

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