
शेख हसीना का तख्तापलट करने वाली Gen Z बांग्लादेश में क्यों हार गए? इन 5 वजहों से खत्म हुई राजनीतिक साख
ABP News
Bangladesh Gen-Z: शेख हसीना के तख्तापलट के लिए जब Gen-Z सड़क पर उतरी तो उसे बांग्लादेश की आम अवाम का भी सहयोग मिला. हालांकि वोटिंग के समय लोगों ने उनके बदले किसी और को अपना नेता चुना.
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को जब आम चुनाव के लिए वोट डाले जा रहे थे तो सबकी नजर वहां की तीन सबसे बड़ी पार्टियों पर थी. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) जिसके मुखिया तारिक रहमान थे. जमात-ए-इस्लामी जिसके मुखिया शफीक-उर-रहमान थे और जातीय नागरिक पार्टी जिसके मुखिया नाहिद इस्लाम थे.
हालांकि 13 फरवरी की शाम जब नतीजे आए तो पता चला कि जिन नाहिद इस्लाम और उनके Gen-Z साथियों की वजह से बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट हुआ और चुनाव की नौबत आई, वो इस चुनाव में 6 सीटों पर ही सिमट गए और जो तारिक रहमान पिछले 18 साल से बांग्लादेश से बाहर थे, Gen-Z के बनाए माहौल में वापसी के बाद वही न सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरे, बल्कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री भी बन गए.
आखिर जिस Gen-Z ने बांग्लादेश की सड़कों पर क्रांति के जरिए शेख हसीना का तख्तापलट कर उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया, बांग्लादेश की अवाम ने उन्हें वोट क्यों नहीं किया. आखिर बांग्लादेश के करीब 12 करोड़ लोगों को Gen-Z से ज्यादा भरोसा उस नेता पर क्यों था, जो 18 साल से बांग्लादेश में था ही नहीं. आखिर Gen-Z की पूरी मेहनत, पूरी क्रांति, उनका बहा खून उनके नेताओं के काम क्यों नहीं आया और क्यों उसका पूरा फायदा तारिक रहमान को ही मिला.
बांग्लादेश में Gen-Z की करारी हार और तारिक रहमान के नेतृ्त्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की जीत की कम से कम पांच ऐसी बड़ी वजहे हैं, जिन्हें भविष्य में किसी भी देश में क्रांति करने की सोचने वाला युवा जरूर परखेगा और तभी वो सड़क पर उतरेगा.













