
शिवपाल यादव ने ट्विटर पर PM मोदी और CM योगी को किया फॉलो, क्या है सियासी संदेश?
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विधानसभा चुनाव ने परिवारिक और सामाजिक दबाव के चलते चाचा को भतीजे के करीब लाकर खड़ा कर दिया था, लेकिन नतीजों के साथ ही दूरियां फिर साफ झलक रही हैं.
यूपी विधानसभा चुनाव के बाद मुलायम सिंह यादव के परिवार में एक बार फिर तनातनी दिखाई दे रही है. मुलायम कुनबे से शिवपाल यादव की दूरियां बढ़ती ही जा रही हैं. इस बीच शिवपाल ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को फॉलो करना शुरू कर दिया है. उनके इस कदम से सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि क्या चाचा बीजेपी का दामन थामेंगे?
बताया जा रहा है कि शिवपाल यादव अयोध्या जाने की तैयारी कर रहे हैं. वो नवरात्रि के दौरान ही अयोध्या जा सकते हैं. भले विधानसभा चुनाव ने परिवारिक और सामाजिक दबाव के चलते चाचा को भतीजे अखिलेश यादव के करीब लाकर खड़ा कर दिया था, लेकिन नतीजों के साथ ही दूरियां फिर साफ झलक रही हैं.
छह साल पहले सियासी वर्चस्व की जंग शुरू हुई थी
चाचा-भतीजे के बीच में छह साल पहले सियासी वर्चस्व की जंग शुरू हुई थी, जिसके बाद शिवपाल ने सपा ने नाता तोड़कर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) नाम से अपनी पार्टी बना ली थी. सपा के संस्थापक मुलायम सिंह के हस्ताक्षेप के बाद चाचा-भतीजे ने 2022 चुनाव में हाथ मिला लिया था, लेकिन शिवपाल को न तो उम्मीद के मुताबिक सम्मान मिला और न ही चुनाव में भागेदारी. शिवपाल को स्टार प्रचारक के तौर पर अखिलेश ने कुछ चुनिंदा सीटों पर ही प्रचार कराया. आखिरी के चरणों में शिवपाल चुनाव प्रचार करने उतरे थे.
शिवपाल का नाराज होना लाजमी था...
अखिलेश ने चाचा शिवपाल को न सिर्फ एक सीट दी बल्कि पार्टी में वह सम्मान भी नहीं दिया जिसकी उन्हें घर वापसी पर उम्मीद थी. मैनपुरी में चुनाव प्रचार के दौरान समाजवादी रथ की जो दो तस्वीर सामने आई थी, उससे शिवपाल का सपा में सियासी कद का एहसास साफ हो रहा था. मुलायम और अखिलेश रथ में सीट पर बैठे थे तो मुलायम की कुर्सी को हत्थे पर शिवपाल बैठे नजर आए थे और चेहरे पर उदासी छाई हुई है, जो उनके दर्द को बयां कर रही थी. वहीं, एक समय था जब वो मुलायम के बराबर वाली सीट पर बैठा करते थे. अखिलेश ने पूरे चुनाव के दौरान शिवपाल को पूरी तरह दरकिनार कर रखा था. इतना नहीं चुनाव के बाद भी अखिलेश ने जिस तरह का व्यवहार रखा, उससे शिवपाल को नाराज होना लाजमी था. अब शिवपाल के तेवर बदल हुए हैं और उनके बीजेपी के जाने की अटकलों का बाजार गरम है.

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