
वैभव सूर्यवंशी का रांची में धमाका... दुबई से लौटकर उड़ा डाले 190 रन, कर दी छक्कों की बारिश
AajTak
वैभव सूर्यवंशी ने विजय हज़ारे ट्रॉफी 2025-26 में बिहार की पारी को तहलका मचा दिया. अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ उन्होंने 84 गेंदों में 190 रन बनाए, जिसमें 16 चौके और 15 छक्के शामिल थे. 36 गेंदों में शतक लगाकर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी उभरती प्रतिभा और आक्रामक बल्लेबाजी का औक और परिचय दिया.
विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के प्लेट ग्रुप में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ बिहार की पारी महज स्कोरकार्ड की कहानी नहीं थी, बल्कि एक 14 साल के बल्लेबाज की एक और बड़ी कहानी रही. इस रन-तूफान के ठीक बीच खड़ा था एक नाम, जो अब घरेलू क्रिकेट में अपने चरम पर छा गया है और यह है वैभव सूर्यवंशी.अंडर19 एशिया कप में उम्मीद के अनुरूप पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में बल्ला न चला पाने का मलाल लिये रांची में उतरे वैभव ने 190 रनों की झन्नाटेदार पारी खेली.
बुधवार को JSCA Oval Ground, Ranchi में टॉस जीतकर बिहार ने बल्लेबाजी चुनी और शुरुआत से ही साफ कर दिया कि इरादा बड़ा है. लेकिन जो हुआ, वह इरादे से कहीं आगे चला गया. वैभव सूर्यवंशी की पारी देखिए- 84 गेंदों में 190 रन, 15 छक्के, 16 चौके और 226.19 का स्ट्राइक रेट- यह लिस्ट-A क्रिकेट की नहीं, मानो T20 की रफ्तार में लिखी गई कहानी थी. खबर लिखे जाने तक बिहार ने 50 ओवरों के इस मैच में 282-2 (30 Ov) का स्कोर खड़ा कर दिया था.
मंगल महरौर (33 रन, 43 गेंद) के साथ वैभव ने पारी की नींव रखी. पहला विकेट 158 रनों पर गिरा... लेकिन उसके बाद वैभव ने गियर बदला. कवर-ड्राइव से लेकर पुल और लॉन्ग-ऑन के ऊपर से उड़ते छक्के... हर शॉट में आत्मविश्वास झलक रहा था.
36 गेंदों में शतक- 10 चौके और 8 छक्के...अरुणाचल का गेंदबाजी आक्रमण पूरी तरह बैकफुट पर चला गया. मिबोम मोसू, टीएनआर मोहित और तेची नेरी किसी के पास वैभव का जवाब नहीं था. इसके बाद वैभव ने 59 गेंदों में 150 रन ((14 x 4, 13 x 6) पूरे किए. आखिरकार नेरी को वैभव का विकेट मिला, लेकिन तब तक बिहार के इस स्टार ने अपना काम कर दिया था... हालंकि वह दोहरे शतक से चूक गए. वैभव का विकेट जब गिरा तब स्कोर 261 था.
वैभव सूर्यवंशी का नाम पिछले कुछ समय से चर्चा में रहा है- कम उम्र, तेज उभार, IPL की चमक और उससे जुड़े सवाल. अंडर-19 स्तर पर भी उनसे बड़ी उम्मीदें जोड़ी गईं. लेकिन अरुणाचल के खिलाफ यह पारी बताती है कि टैलेंट जब आंकड़ों में उतरता है, तो बहस अपने-आप शांत हो जाती है. यह पारी सिर्फ शॉट्स की नहीं, टेम्परामेंट की भी कहानी थी- कब आक्रामक होना है और कब गैप ढूंढना है, वैभव ने दोनों का सही चुनाव किया.
प्लेट ग्रुप, लेकिन संदेश मेन टेबल का

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












