
'लोग मुझे पागल समझते थे, फिर जूना अखाड़े के संत ने.....' कुंभ में वायरल IIT 'इंजीनियर बाबा' ने सुनाई अपनी कहानी
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अभय ने बताया कि जीवन में एक समय ऐसा था जब उनके परिवार वाले और परिचित लोग उन्हें पागल समझने लगे थे. उन्होंने कहा, अगर मुझे लोग पागल बोलते थे तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मेरे परिवार की बिल्कुल अलग स्टोरी है, मुझे बचपन में ख्याल आता था कि मैं घर से भाग जाऊं क्योंकि मैं परिवार से परेशान था उनकी अलग टाइप की सोच थी.
कभी समाज ने उन्हें पागल कहा, तो परिवार ने भी मान लिया कि अब वह पागल होते जा रहे हैं. यह कहानी है आईआईटी इंजीनियर अभय सिंह की, जो हरियाणा के हिसार के रहने वाले हैं और फिलहाल कुंभ मेले में बाबा बने हुए हैं. अभय सिंह को जीवन के सत्य को जानने का गहरा जुनून था, इसीलिए उन्होंने इस रास्ते पर चलने का निर्णय लिया.
वे फिलहाल महाकुंभ में हैं, जहां उन्हें काशी में जूना अखाड़ा के एक संत लेकर आए हैं. यहां, अभय सिंह साधु वेश में रहकर कुंभ के अनुभवों को सीख रहे हैं और इस समय वह काफी वायरल हो रहे हैं. उनका जीवन एक अद्भुत यात्रा का उदाहरण बन चुका है, जो समाज की सीमाओं को पार करते हुए अपने सत्य की खोज में अग्रसर है. आजतक की टीम ने अभय से बातचीत की और उनकी पुरानी जिंदगी के बारे में जानने की कोशिश की कि कैसे वह आईआईटी छोड़ आस्था के रास्ते पर चल पड़े. बता दें कि अभय ने अपने पहले अटेंप्ट में ही आईआईटी एंट्रेंस क्लियर कर लिया था.
'कोई साधु या संत नहीं...'
आजतक से बातचीत में अभय ने कहा, 'मैं तो बस सीखने आया हूं मैं किसी मत से जुडा नहीं हूं, कहीं दीक्षित नहीं हूं, कोई साधु या महंत नहीं हूं. मुझे तो मोक्ष के लिए आने वाली हर बाधा को दूर करना है. जटाएं तो बहुत सुंदर होती हैं, मेरी स्पिरिचुअल जर्नी नीचे नहीं ऊपर गई है. मैं बिल्कुल फ्लूइड रूप में हूं, मुक्त हूं मैं कुछ भी कर सकता हूं.'
डिप्रेशन में थे अभय
अभय ने बताया कि आईआईटी मुंबई में जाने के बाद उन्हें अपनी लाइफ को लेकर चिंता हुई और उन्होंने सोचा कि अब वे क्या करेंगे. बातचीत में अभय ने कहा, 'प्रश्न से ही कोई यात्रा शुरू होती है मेरे मन में भी कई प्रश्न थे. आईआईटी में जाने के बाद मेरे मन में भी प्रश्न आया कि अब लाइफ में क्या करूं. कुछ ऐसा ढूंढना था कि आजीवन कर सकूं. आईआईटी के बाद तो क्या करता कोई कंपनी ज्वॉइन करता, कितने प्लेन बनाता, मैं भी डिप्रेशन में आया था.

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