
लंबा खिंचता दिख रहा ईरान युद्ध, ट्रंप की राष्ट्रपति की कुर्सी भी खतरे में पड़ेगी?
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अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध लंबा खिंचता दिख रहा है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह युद्ध सितंबर तक खिंच सकता है और ऐसा हुआ, तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के लिए भी खतरा बन सकता है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खुमैनी की मौत के दो दिन बाद कहा था कि यह युद्ध चार से पांच हफ्ते तक चल सकता है. इसके विपरीत ईरान युद्ध लंबा खिंचता दिख रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक युद्ध सितंबर तक खिंच सकता है और इससे बतौर राष्ट्रपति ट्रंप की स्थिति पर असर पड़ सकता है. कहा तो यहां तक जाने लगा है कि यह डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर 28 फरवरी को हमला किया था. हमले के हफ्तेभर हो चुके हैं और युद्ध की आग मध्य पूर्व के नौ देशों तक फैल चुकी है. बदलते हालात में इसका असर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल पर भी पड़ सकता है. अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन अब लंबे संघर्ष के लिए अपने संसाधन तैयार कर रहा है. अधिकारियों की मानें तो यह युद्ध कम से कम सितंबर तक चल सकता है, जो अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से दो महीने पहले का समय होगा.
यह ट्रंप के उस बयान के चार दिन बाद की स्थिति है, जिसमें उन्होंने कहा था कि युद्ध चार से पांच हफ्ते तक चलेगा. रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप प्रशासन इस स्तर के युद्ध के लिए तैयार नहीं था. अमेरिका और इजरायल को उम्मीद थी कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान झुक जाएगा और वहां सत्ता परिवर्तन हो सकता है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके उलट खामेनेई की मौत के बाद ईरान और ज्यादा आक्रामक हो गया है.
ईरान में लंबी लड़ाई की तैयारी
पॉलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन अब खुफिया अभियानों का तेजी से विस्तार कर रहा है और वॉशिंगटन, इजरायल के साथ मिलकर ईरान में लंबी लड़ाई की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने फ्लोरिडा के टैम्पा स्थित अपने मुख्यालय में अतिरिक्त सैन्य खुफिया अधिकारियों की तैनाती की मांग की है. ये अधिकारी कम से कम सौ दिन तक ईरान के खिलाफ अभियानों में मदद करेंगे. इसे इस युद्ध के लिए खुफिया कर्मचारियों को बढ़ाने की दिशा में ट्रंप प्रशासन का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है.
इसके साथ ही अमेरिका ने भारत को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल कार्गो खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है. यह कदम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान के बीच उठाया गया है और इससे संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति जल्द सामान्य हो सकती है. तेजी से की जा रही सैन्य तैयारियां भी यह दिखाती हैं कि वॉशिंगटन ने इस संघर्ष के आकार और ईरान की क्षमता को कम आंका था. आमतौर पर बड़े सैन्य अभियान महीनों की योजना के बाद शुरू होते हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने बहुत कम समय में सेना को तैनात किया.

डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि ईरान को सरेंडर करना चाहिए, लेकिन यह मामला इतना सरल नहीं है. अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते को दोबारा सामान्य करने की कोशिश कर रहा है क्योंकि इस रास्ते पर आवाजाही बंद होने से तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का खतरा बना हुआ है. यह क्षेत्र वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां की आवाजाही में बाधा के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. देखें वीडियो.

अमेरिका लगातार ईरान को धमका रहा है. हथियार डालने की अपील कर रहा है. ट्रंप तो यहां तक कह रहे हैं कि झुक जाओ नहीं तो मौत निश्चित है. लेकिन ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है. ईरान झुक नहीं रहा है, उस पर लगातार इजरायल और अमेरिका के हवाई हमले हो रहे हैं. लेकिन ईरान भी पूरा जवाब दे रहा है. इस बीच ट्रंप ने ये साफ कर दिया है कि खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई को अगर ईरान ने सुप्रीम लीडर बनाया तो वो अमेरिका को स्वीकार नहीं होंगे.

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