
मिडल ईस्ट में महाजंग: 7 दिन, 14 देश और तबाही का मंजर... जानें अब तक क्या-क्या हुआ
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अमेरिका और इजरायल के हमलों को एक हफ्ता पूरा हो चुका है, लेकिन मध्य पूर्व में भड़की आग ठंडी होने के बजाय और फैलती नजर आ रही है. इन सात दिनों में हालात इतनी तेजी से बदले हैं कि संघर्ष अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा.
मिडल ईस्ट में चल रहे अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष को अब एक हफ्ता पूरा हो चुका है. पिछले सात दिनों में हालात इतनी तेजी से बदले हैं कि यह टकराव अब सिर्फ दो-तीन देशों तक सीमित नहीं रहा. कई क्षेत्रीय ताकतें भी अलग-अलग तरीके से इस जंग में शामिल होती दिख रही हैं. 28 फरवरी की सुबह शुरू हुआ यह अभियान पहले ईरान के सैन्य और परमाणु ढांचे को तबाह करने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में इसका असर पूरे इलाके में दिखाई देने लगा. मिसाइल हमले, ड्रोन और हवाई कार्रवाई के बीच मिडल ईस्ट के कई देश इसकी चपेट में आ चुके हैं.
इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई समेत उनके नेतृत्व के कई प्रमुख लोगों की मौत की खबर सामने आई है. इसके बाद ईरान ने भी कई जगहों पर जबरदस्त जवाबी हमले किए. खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और कई शहरों में एयर डिफेंस सिस्टम चौबीसों घंटे सक्रिय हो गए हैं. पिछले एक हफ्ते में यह संघर्ष कई मोर्चों पर फैल गया है. ईरान के सहयोगी माने जाने वाले संगठन भी एक्टिव हो गए और इजरायल पर हमले शुरू कर दिए, जिसके जवाब में इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में बड़ी हवाई कार्रवाई की.
इस दौरान आम लोगों पर भी भारी असर पड़ा है. ईरान में अब तक करीब 1200 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें 165 स्कूली छात्राएं भी शामिल बताई गई हैं. इसके अलावा हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोने की घटना भी सामने आई, जिसमें 87 नाविकों की मौत हुई. युद्ध का असर सिर्फ बॉर्डर तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर भी इसका बुरा असर पड़ने लगा है. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं.
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ईरान युद्ध: पहला दिन
संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इजरायल के एक साझा और सोचे-समझे हमले से हुई. अमेरिका ने अपने इस अभियान को 'एपिक फ्यूरी' नाम दिया, जबकि इजरायल ने इसे 'रोरिंग लायन' कहा. इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा लड़ाकू विमानों और भारी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया. हमलों का मुख्य निशाना सरकारी इमारतें, राष्ट्रपति का आवास और सुप्रीम लीडर का दफ्तर था. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर आई. इसी दौरान ईरान के मीनाब इलाके में एक प्राइमरी स्कूल पर हमले में 165 लड़कियों की मौत हो गई, जिसे इस संघर्ष की अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी माना जा रहा है. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे. इस हमले की चपेट में दुबई के कुछ प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट्स भी आ गए, जिन्हें निशाना बनाया गया.

अमेरिका लगातार ईरान को धमका रहा है. हथियार डालने की अपील कर रहा है. ट्रंप तो यहां तक कह रहे हैं कि झुक जाओ नहीं तो मौत निश्चित है. लेकिन ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है. ईरान झुक नहीं रहा है, उस पर लगातार इजरायल और अमेरिका के हवाई हमले हो रहे हैं. लेकिन ईरान भी पूरा जवाब दे रहा है. इस बीच ट्रंप ने ये साफ कर दिया है कि खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई को अगर ईरान ने सुप्रीम लीडर बनाया तो वो अमेरिका को स्वीकार नहीं होंगे.

अमेरिकी हमले में ईरानी सैनिकों को श्रीलंका ने कहा अलविदा, प्रदर्शन में लगे 'नो ब्लड फॉर ऑयल' के नारे
श्रीलंका के गाले तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में डूबे ईरानी युद्धपोत IRIS Dena से मिले 84 नाविकों के शवों का पोस्टमार्टम पूरा हो गया है. इनमें से 80 शवों की पहचाकर ली गई है. जहाज भारत के विशाखापत्तनम से नौसैनिक अभ्यास में भाग लेकर ईरान लौट रहा था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर के चयन में अपनी अहम भूमिका की बात कही है. उन्होंने कहा कि मोजतबा खामेनेई को वे स्वीकार नहीं करते. इस बयान पर ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने जवाब दिया. नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान खतीबज़ादेह ने कहा कि ट्रंप न्यूयॉर्क के मेयर तक चुन नहीं सकते, फिर भी वह ईरान के सुप्रीम लीडर का चयन करने की बात कर रहे हैं. देखें वीडियो.

लेबनान में बढ़ते तनाव के बीच हिज़्बुल्लाह ने दावा किया है कि उसने इज़रायल के एक सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमला किया है. संगठन के मुताबिक यह कार्रवाई बेरूत और अन्य लेबनानी इलाकों पर इज़रायली हमलों के जवाब में की गई. वहीं इज़रायली वायुसेना ने भी बेरूत के दहियेह इलाके में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं.









