
' खामेनेई हमारे नेता, हम शहीदों की औलाद...', सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान में पहली जुमे की नमाज
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ईरान में शुक्रवार की नमाज कुछ खास थी. ये जुमे की वो नमाज थी जब वर्षों बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई इस दुनिया में नहीं थे. ईरानी अपने प्रिय नेता को याद करते हुए बिलख-बिलख कर रो रहे थे. शुक्रवार को ईरान के शहर काले लिबास वाले इंसानों से पटे हुए थे. गम और गुस्से का समंदर यहां साफ दिख रहा था.
दस-ग्यारह बजते ही तेहरान की सड़कों पर मर्दों और महिलाओं का हुजूम सा उमड़ पड़ा था. महिलाएं काले लिबास में थीं और पर्दा किए हुए थीं. लेकिन उनका गुस्सा साफ-साफ महसूस किया जा सकता था. पुरुष भी काले कपड़े में थे लेकिन वे मुखर थे और इजरायल-अमेरिका की बर्बादी नारे जोर-शोर से लगा रहे थे.
शुक्रवार को अली खामेनेई की मौत के ठीक एक सप्ताह बाद ईरान में पहली जुमे की नमाज अदा हुई. युद्ध की आग, अमेरिका-इजरायल के लगातार एयरस्ट्राइक्स और राष्ट्रीय शोक के बीच तेहरान के इमाम खुमैनी मसल्ला, एंगेलाब स्क्वायर और सैकड़ों मस्जिदों में लाखों लोग जमा हुए. यूं लगता था शहर काले कपड़ों से ढक गया है. कुछ लोगों के हाथों में खामेनेई की तस्वीरें थी, तो कुछ हाथ इजरायल और अमेरिका के विरोध में प्लेकार्ड लेकर अपना प्रतिरोध जाहिर कर रहे थे.
आंसू भरे आंखों और मुट्ठियां तानकर रमजान के महीने में लोग 'ल्बैक या खामेनेई- ऐ खामेनेई, मैं हाजिर हूं!', 'मर्ग बर अमेरिका-अमेरिका मुर्दाबाद', 'मर्ग बर इस्राइल-इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे थे. यह नमाज सिर्फ इबादत नहीं, बल्कि प्रतिरोध और एकता का ऐतिहासिक प्रदर्शन बन गई.
अल जज़ीरा की एक टीम ने बताया कि भीड़ इजरायली और अमेरिकी बमबारी के बावजूद जरा सा भी भयभीत नहीं थी. ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले के बाद पहली बार ईरानी कौम इतनी बड़ी तादाद में सड़क पर आई थी. इससे पहले मिनाब की शहीद बच्चियों के जनाजे की नमाज में भी ऐसा ही माहौल देखने को मिला था.
ईरानी मीडिया द्वारा शेयर किए गए फुटेज में राजधानी में इमाम खुमैनी की ग्रैंड मस्जिद के बाहर खुली जगह पर काले कपड़े पहने पुरुषों और महिलाओं की भीड़ दिख रही है.
इस दौरान लाउडस्पीकर पर एक शख्स भीड़ को संबोधित करता है और अली खामेनेई के लिए दुख जताता है. इस शख्स ने कहा, "खामेनेई हमारे समय में ईमान के प्रतीक थे, वे हमारे रखवाले थे. जबकि पास ही प्रार्थना की चटाई पर बैठे दूसरे लोग खुलेआम रो रहे थे.

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