
रेड सी में जंग हुई तेज, अब हूती ने MV साईबाबा जहाज पर अमेरिकी बमबारी का लगाया आरोप
AajTak
इंडियन नेवी ने एमवी साईबाबा पर भारतीय ध्वज लगे होने के अमेरिकी दावों का खंड किया है. भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने रविवार को कहा कि यह भारत-ध्वज वाला जहाज नहीं था, जैसा कि पहले अमेरिका ने दावा किया था, बल्कि इस जहाज पर गैबॉन का झंडा लगा था.
यमन के सशस्त्र विद्रोही समूह अंसारुल्लाह (जिसे हूती, हौती या हौथी के नाम से भी जाना जाता है) ने लाल सागर में एमवी साईबाबा जहाज पर हुए ड्रोन अटैक का आरोप अमेरिका पर मढ़ा है. अंसारुल्लाह ने एक बयान में कहा है, 'जब अमेरिकी नौसेना ने हमारे निगरानी ड्रोन को देखा तो ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी. इस क्रम में यूएस नेवी ने एमवी साईबाबा जहाज को निशाना बना लिया'.
इससे पहले अमेरिकी ने यमन के हूती विद्रोहियों पर लाल सागर में भारतीय ध्वज वाले क्रूड ऑइल शिप पर ड्रोन अटैक करने का आरोप लगाया था. यूएस सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा, 'गैबॉन के स्वामित्व वाले एम/वी साईबाबा ने बताया कि उस पर ड्रोन से हमला हुआ है. इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. हमारे युद्धपोत यूएसएस लैबून (डीडीजी 58) ने एमवी साईबाबा की ओर से आए डेंजर अलर्ट कॉल्स का जवाब दिया. हूती विद्रोहियों द्वारा 17 अक्टूबर के बाद से कर्मशियल जहाजों पर यह 14वां या 15वां हमला है'.
'एमवी सईबाबा जहाज पर नहीं लगा था भारत का ध्वज'
हालांकि, इंडियन नेवी ने एमवी साईबाबा पर भारतीय ध्वज लगे होने के अमेरिकी दावों का खंड किया है. भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने रविवार को कहा, '25 भारतीय चालक दल के सदस्य गैबन-ध्वज वाले जहाज एमवी साईबाबा पर सवार थे, जिस पर लाल सागर में ड्रोन से हमला हुआ. चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं. यह भारत-ध्वज वाला जहाज नहीं था, जैसा कि पहले अमेरिका ने दावा किया था, बल्कि इस जहाज पर गैबॉन का झंडा लगा था'.
अरब सागर में CHEM प्लूटो जहाज पर हुआ ड्रोन अटैक
इससे पहले 23 दिसंबर को गुजरात के वेरावल तट से 200 नॉटिकल मील दूर अरब सागर में एक मर्चेंट शिप पर संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ था. इस जहाज के चालक दल में 21 भारतीय शामिल थे. अमेरिकी रक्षा विभाग ने हवाई हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था. CHEM प्लूटो नाम के इस जहाज पर लाइबेरियाई झंडा लगा हुआ था, जिसका मालिकाना हक जापानी कंपनी के पास है और नीदरलैंड से संचालित होता है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.






