
युवाओं की एक टोली ने पूर्वांचल के गांवों से क्यों निकाली एक महीने की साइकिल यात्रा?
BBC
खुद को गांधीवादी विचारधारा से जोड़ने वाले 15 युवाओं ने गोरखपुर के चौरी-चौरा से वाराणसी तक करीब 1200 किलोमीटर साइकिल पर यात्रा निकाली.
बीते कुछ दिनों से बनारस के गांवों में कुछ नारों की गूंज सुनाई दे रही थी.
इनमें 'मनरेगा बहाल करो, कौन बनाता हिन्दुस्तान- भारत का मज़दूर किसान, कौन खिलाता हिन्दुस्तान- भारत का मज़दूर किसान, हल्लाबोल-हल्लाबोल, 'वीबी जी रामजी' काला कानून वापस लो' जैसी मांंग शामिल है.
जिस तरफ़ से युवाओं की साइकिल का काफिला गुज़र रहा था उन इलाकों में हलचल का माहौल था और ये लोग सरकार बदलने की मांग और सरकार पर तानाशाही के आरोप लगाते जा रहे थे.
कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार साल 2005 में मनरेगा क़ानून लेकर आई थी जिसके तहत ग्रामीण इलाक़े के परिवारों को साल में 100 दिन रोज़गार की गारंटी थी.
इसके बीस साल बाद केंद्र सरकार 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी 'वीबी- जी राम जी' क़ानून लेकर आई है. नए अधिनियम में साल में 125 दिन रोज़गार देने का प्रस्ताव है.
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मनरेगा के प्रावधानों के मुताबिक़ मज़दूरों को दी जाने वाली मज़दूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, जबकि सामान वगैरह का खर्च राज्य सरकारें एक निश्चित अनुपात में उठाती थीं. इसके अलावा प्रशासनिक ज़िम्मेदारी में राज्य सरकार की बड़ी भूमिका है.













