
मोदी सरकार के White Paper के बदले कांग्रेस का Black Paper, क्या हैं ये दस्तावेज और क्यों जारी होते हैं?
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बीजेपी ने दावा किया कि जब साल 2014 में उसने सत्ता संभाली, तो देश की इकोनॉमी काफी खस्ताहाल थी. व्हाइट पेपर यानी श्वेत पत्र में मोदी सरकार के सेंटर में आने से पहले और बाद के सालों की तुलना है. UPA के कार्यकाल पर व्हाइट पेपर लाने के भाजपा के एलान के बाद कांग्रेस ने ब्लैक पेपर जारी कर दिया. जानिए, क्या है ये दोनों पेपर.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूपीए सरकार के एक दशक के कामकाज को लेकर संसद में श्वेत पत्र जारी किया. इसमें कहा गया कि बीजेपी को विरासत में जो इकोनॉमी मिली, उसकी हालत काफी खराब थी. इसके बाद से हंगामा मचा हुआ है. भाजपा के जवाब में विपक्ष ने ब्लैक पेपर निकाल दिया, जो उल्टे सत्ता पर आरोप लगा रहा है. ये दोनों ही पेपर्स सरकारी दस्तावेज हैं, जो समय-समय पर या जरूरत के मुताबिक जारी होते आए हैं.
क्या है व्हाइट पेपर ये सरकारी डॉक्युमेंट है, जो किसी खास मुद्दे पर जानकारी और फैक्ट्स देता है. इस पेपर का मकसद आगे चलकर पॉलिसी को आकार देना रहता है. सरकार जब भी श्वेत पत्र लाने का एलान करती, या लाती है तो साफ है कि वो किसी टॉपिक पर चर्चा या सुझाव लेना-देना चाहती है. ये पिछले सालों के खोया-पाया का हिसाब भी हो सकता है.
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कब हुई शुरुआत
वैसे तो व्हाइट पेपर की शुरुआत को लेकर अलग-अलग मत हैं, लेकिन ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि साल 1922 में सबसे पहले व्हाइट पेपर आया. तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने एक दंगे की सफाई देते हुए इसे जारी किया था. इसे तब चर्चिल व्हाइट पेपर भी कहा जाने लगा, जो कि बाद में व्हाइट पेपर ही रह गया.

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