
मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट: आरे में क्या फिर काटे जाने लगे पेड़? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
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मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. कुछ याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि फिर आरे में पेड़ काटे जाने लगे हैं. इस पर MMRCL ने भी अपना जवाब दाखिल किया है.
मुंबई के आरे में बनने जा रहे मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट पर विवाद बढ़ता जा रहा है. जो प्रोजेक्ट पिछले कई सालों से बीच मझधार में फंसा हुआ है, सत्ता परिवर्तन के बाद भी अड़चने कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं. इसी कड़ी में अब कुछ याचिकाकर्ता फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं. तर्क दिया जा रहा है कि एक बार फिर आरे में पेड़ काटने का काम शुरू कर दिया गया है. उनकी तरफ से इसका विरोध किया जा रहा है, स्पष्ट कहा जा रहा है कि ये कोर्ट के ही 2019 के उस आदेश का उल्लंघन है जहां पर पेड़ काटने पर रोक लगाई गई थी.
अब Mumbai Metro Rail Corporation (MMRCL) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है. MMRCL की तरफ से SG तुषार मेहता ने कोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि अभी तक आरे में कोई पेड़ नहीं काटा गया है. जब से 2019 में इस पर रोक लगाई गई थी, ऐसी किसी भी प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया गया. तुषार मेहता कहते हैं कि सिर्फ कुछ झाड़ियां, घांस काटी गई है. कुछ पत्तियों को भी काटा गया है, लेकिन किसी भी पेड़ को पूरा नहीं काटा गया. अब यहां ये जानना जरूरी हो जाता है कि जब से महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की सरकार बनी है, एक बाक फिर मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट का कार्य आरे में शिफ्ट कर दिया गया.
इससे पहले महा विकास अघाडी सरकार के दौरान विरोध की वजह से इस प्रोजेक्ट को आरे से हटा कांजुरमार्ग में शिफ्ट कर दिया गया था. लेकिन देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी ने इसका काफी विरोध किया. ऐसे में अब जब फिर उनकी सरकार सत्ता में आ गई है, इस ड्रीम प्रोजेक्ट का काम आरे में शुरू कर दिया गया. अब इसी प्रोजेक्ट को लेकर कुछ एनवायरमेंटलिस्ट चिंतित हैं. उनका मानना है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से आरे के जंगलों के कई पेड़ों को काटा जाएगा. इससे पर्यावरण को सीधा नुकसान पहुंचेगा.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अभी के लिए इस मामले में कोई अलग से आदेश जारी करने से मना कर दिया है. अभी कोर्ट ने MMRCL के जवाब में विश्वास जताया है और ये कहा है कि कोर्ट के 2019 वाले फैसले के बाद से कोई पेड़ नहीं काटा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने ये स्पष्ट कर दिया है कि अगले आदेश तक कोई पेड़ काटा भी नहीं जाएगा. इस मामले में अगली सुनवाई 13 अगस्त को होने वाली है.

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