
महाशक्तियों की महाबैठक कल, पुतिन से मिलेंगे PM मोदी... SCO समिट के जॉइंट स्टेटमेंट पर रहेगी दुनिया की निगाह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से तिआनजिन में मुलाकात कर आतंकवाद, व्यापार और सहयोग पर चर्चा की. दोनों नेताओं ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, ट्रंप टैरिफ़ और व्यापार घाटे पर भी विचार किया. सोमवार को SCO लीडर्स की बैठक होगी, जिसमें सभी सदस्य देशों के नेता हिस्सा लेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन के दौरे पर हैं. रविवार को तिआनजिन में उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. वहीं, एससीओ समिट के दौरान सदस्य देश के नेताओं का औपचारिक ग्रुप फोटो सेशन भी हुआ, जिसमें पीएम मोदी पहली पंक्ति में खड़े नजर आए. उनके साथ मेजबान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी खड़े थे. जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन ने समिट से पहले अंतरराष्ट्रीय अतिथियों के स्वागत में एक भव्य भोज का आयोजन किया. अब सोमवार यानी 1 सितंबर को SCO लीडर्स की मीटिंग होगी. ऐसे में जॉइंट स्टेटमेंट पर दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी. सोमवार को पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात भी होगी.
रविवार को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात में क्या-क्या हुआ? विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की आतंकवाद, व्यापार और आपसी सहयोग पर अहम चर्चा हुई. पीएम मोदी ने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और इस चुनौती से निपटने में चीन का सहयोग मांगा. चीन ने इस पर भारत को समर्थन देने का आश्वासन दिया.
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विक्रम मिसरी ने कहा कि जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठक के दौरान आतंकवाद को प्राथमिकता के तौर पर उठाया गया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने सीमा पार आतंकवाद को प्राथमिकता के तौर पर उल्लेख किया, यह ऐसा मुद्दा है जो भारत और चीन दोनों को प्रभावित करता है और इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम इस संकट से निपटने के लिए एक-दूसरे के प्रति समझ और समर्थन बढ़ाएं. विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद से निपटने में भारत और चीन के बीच आपसी समझ और सहयोग को मज़बूत करने की ज़रूरत पर बल दिया. मिसरी के अनुसार प्रधानमंत्री ने बैठक में साफ तौर पर कहा कि आतंकवाद दोनों देशों को प्रभावित करता है.
ट्रंप के टैरिफ पर क्या बात हुई?
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मिसरी से यह भी पूछा गया कि क्या दोनों नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ के प्रभावों पर चर्चा की. क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 50% और चीनी आयात पर 30% टैरिफ लगाया है. इस सवाल का जवाब देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि दोनों नेताओं ने वैश्विक आर्थिक स्थिति पर चर्चा की और इससे उत्पन्न चुनौतियों को स्वीकार किया. हालांकि उनका ध्यान मुख्य रूप से द्विपक्षीय मुद्दों पर रहा. उन्होंने इस पर विचार किया कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत-चीन के बीच बेहतर समझ और आर्थिक सहयोग कैसे बढ़ाया जाए.

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