
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में ख़ुद दलील देने का फ़ैसला क्यों किया, क्या हैं इसके संदेश?
BBC
ममता बनर्जी की राजनीति में एक निरंतरता है कि वह सड़क पर उतरने में हिचकती नहीं हैं. चाहे वह सत्ता में रहें या विपक्ष में, जब भी कोई राजनीतिक टकराव का मुद्दा आता है तो मोर्चा ख़ुद संभाल लेती हैं.
पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे को लेकर राजधानी दिल्ली में मोर्चा खोल दिया है.
सुप्रीम कोर्ट में ख़ुद मौजूद रहने से लेकर चुनाव आयोग के साथ बैठक तक मुख्यमंत्री ने इन तीन दिनों में ज़ोरदार तरीक़े से केंद्र सरकार को घेरा.
ममता बनर्जी की छवि संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष करने वाली नेता की रही है. लेकिन बुधवार को वह सुप्रीम कोर्ट में जजों के दलील देती भी दिखीं.
दिल्ली में एसआईआर का मुद्दा जिस तरह से अदालत से लेकर चुनाव आयोग तक उछाला, उसे एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि ममता लड़ाई किसी भी स्तर पर लड़ सकती हैं.
ममता की यह राजनीतिक शैली रही है कि राजनीतिक टकराव मोर्चा ख़ुद संभालती हैं. चाहे यह लड़ाई संस्थान से हो या किसी पार्टी से.
ये अलग बात है कि ममता बनर्जी के इस रुख़ को विपक्षी पार्टियां ड्रामेबाज़ी कहती हैं.













