
भारत के बाद पाकिस्तान को भी रूस ने दिया बड़ा ऑफर, सऊदी-यूएई को झटका
AajTak
विदेशी मुद्रा की कमी और गंभीर आर्थिक संकट के बीच रूस, पाकिस्तान को रियायत कीमतों पर कच्चा तेल निर्यात करेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस से आने वाली तेल की पहली खेप मई में कराची पहुंचेगी. इससे पहले दिसंबर 2022 में रूस ने पाकिस्तान को 30 प्रतिशत छूट पर कच्चा तेल निर्यात करने से इनकार कर दिया था.
पाकिस्तान पिछले कुछ महीनों से गंभीर आर्थिक संकट और महंगाई से जूझ रहा है. इस मुश्किल परिस्थिति में रूस ने पाकिस्तान की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस भारत की तरह पाकिस्तान को भी सस्ता तेल निर्यात करेगा. पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री मुसादिक मलिक के अनुसार, पाकिस्तान ने रियायत कीमतों पर रूसी कच्चे तेल की पहली खेप का ऑर्डर कर दिया है. इस डील से भुगतान संकट और गंभीर रूप से विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान को कुछ राहत मिलेगी.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में मुसादिक मलिक ने कहा, "पाकिस्तान और रूस के बीच हुए ट्रेड डील के तहत हमने रियायत कीमतों पर रूसी कच्चे तेल के लिए अपना पहला ऑर्डर दे दिया है. हमारे ऑर्डर प्लेस भी हो गए हैं. यह शिपमेंट मई में कराची बंदरगाह पर डॉक होने की उम्मीद है.
मंत्री मुसादिक मलिक के अनुसार इस सौदे के तहत पाकिस्तान रूस से केवल कच्चा तेल खरीदेगा. पाकिस्तान रूस से रिफाइन ईंधन नहीं खरीदेगा. इस डील के बाद रूस से पाकिस्तान की तेल आयात प्रति दिन एक लाख बैरल तक पहुंचने की उम्मीद है.
रूस का भी फायदा लेकिन सऊदी-यूएई का नुकसान
वहीं, पाकिस्तान का रूस से कच्चा तेल खरीदना रूस के लिए भी फायदे का सौदा है. रूस को पाकिस्तान के रूप में एक नया खरीदार मिला है. भारत और चीन के बाद पाकिस्तान तीसरा देश होगा, जो अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी रूस से भारी मात्रा में तेल आयात करेगा.
यूक्रेन से युद्ध के कारण पश्चिमी देश रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं. इसके अलावा रूसी कच्चे तेल पर भी प्राइस कैप लागू है. अमेरिका के नेतृत्व में जी-7 और पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर प्राइस कैप लगाकर उसकी कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल तय कर दी है. हालांकि, व्यापारियों और समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, भारत और चीन प्राइस कैप से ऊपर भुगतान कर रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.

आज यु्द्ध का 24वां दिन है. इजरायल पर ईरान और जवाब में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. इस बीच सवाल ये कि क्या डोनाल्ड ट्रंप हॉर्मुज पर फंस गए हैं. ट्रंप के बार-बार बदलते बयानों से लग रहा है कि जंग छेड़ने से पहले हॉर्मुज को लेकर ट्रंप सोच नहीं पाए थे. देखें कैसे बदलते जा रहे ट्रंप के बयान.











