
ब्लड शुगर का कौन सा लेवल हो सकता है जानलेवा? जानें डायबिटीज से जुड़ी जानकारी
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डायबिटीज भारत में सबसे आम बीमारी बन चुकी है. यहां रोजाना कई लोगों को इस बीमारी की शिकायत हो रही है जिसकी सबसे बड़ी वजह जागरूकता ना होना और गलत लाइफस्टाइल है. डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रखना काफी जरूरी है. इस आर्टिकल में हम आपको ब्लड शुगर से जुड़ी हर एक अहम जानकारी दे रहे हैं जो इस बीमारी से पीड़ित लोगों के साथ ही हर किसी को पता होनी चाहिए.
भारत में डायबिटीज के काफी अधिक लोग हो गए हैं. यह किसी महामारी की तरह फैल रही है जिसकी चपेट में उम्रदराज लोगों से लेकर बच्चे भी आ रहे हैं. अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो आप जानते ही होंगे कि इस बीमारी को मैनेज करना कितना मुश्किल होता है. डायबिटीज में आपके शरीर का ब्लड शुगर (खून में ग्लूकोस की मात्रा) सामान्य से ज्यादा हो जाती है.
लंबे समय तक ब्लड शुगर के ज्यादा रहने से व्यक्ति को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. कई बार डायबिटीज की बीमारी में रोगियों का ब्लड शुगर कम और ज्यादा होना खतरनाक स्थिति है. ब्लड शुगर के कम होने से मरीज की जान भी जा सकती है. इस आर्टिकल में हम आपको ब्लड शुगर से जुड़ी हर एक अहम जानकारी देंगे और यह भी बताएंगे कि ब्लड शुगर का कौन सा स्तर डायबिटीज रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है. साथ ही आपको ब्लड शुगर के घटने-बढ़ने को मैनेज करने के तरीके भी बताएंगे.
सामान्य ब्लड शुगर क्या होता है अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, एक सामान्य फास्टिंग ब्लड शुगर यानी सुबह के समय जब आपने 8 घंटे तक पानी के अलावा कुछ भी खाया या पिया नहीं हो, वो 100 mg/dLसे कम होनी चाहिए है. 100 mg/dL का मतलब है कि आपका ब्लड शुगर सामान्य है.
वहीं, अगर किसी की फास्टिंग ब्लड शुगर रीडिंग 100 से 125 mg/dL के बीच आती है तो इसका मतलब है कि उन्हें प्री-डायबिटीज (डायबिटीज की शुरुआत) का खतरा है. इसके अलावा 125 से ऊपर की रीडिंग डायबिटीज का इशारा करती है.
फास्टिंग ब्लड शुगर के जरिए डायबिटीज के स्तर का पता लगाया जा सकता है. इसे आप इस तरह भी समझ सकते हैं. 100 mg/dl से कम- सामान्य 100 mg/dl से 125 mg/dl-प्रीडायबिटीज 126 mg/dl या अधिक -डायबिटीज
हाई ब्लड शुगर से खतरा हाई ब्लड शुगर होने का मतलब है कि आपके खून में बहुत अधिक शुगर है और आपके शरीर में इंसुलिन की कमी हो रही है जो आपके शुगर लेवल को काबू में नहीं कर पा रही. यह स्थिति कई कारणों से बन सकती है जिसमें भोजन से पर्याप्त इंसुलिन नहीं मिल पाना, बहुत कम व्यायाम करना, जरूरत से अधिक खाना-पीना, तनाव, हार्मोनल परिवर्तन और नींद की कमी शामिल है.

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