
पूर्व PM शेख हसीना की बढ़ीं मुश्किलें! बांग्लादेश में नरसंहार के आरोपों की जांच शुरू
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बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की जांच एजेंसी में बुधवार को हसीना, अवामी लीग के महासचिव और पूर्व सड़क परिवहन और पुल मंत्री ओबैदुल कादर, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पार्टी के कई अन्य प्रमुख लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई. शिकायतकर्ता के वकील गाजी एमएच तमीम ने गुरुवार को पुष्टि की कि ट्रिब्यूनल ने बुधवार रात को जांच शुरू कर दी है.
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और 9 अन्य के खिलाफ नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध के आरोपों की जांच शुरू कर दी है. ये आरोप 15 जुलाई से 5 अगस्त के बीच उनकी सरकार के खिलाफ छात्रों के बड़े पैमाने पर आंदोलन के दौरान लगे थे.
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की जांच एजेंसी में बुधवार को हसीना, अवामी लीग के महासचिव और पूर्व सड़क परिवहन और पुल मंत्री ओबैदुल कादर, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पार्टी के कई अन्य प्रमुख लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई. शिकायतकर्ता के वकील गाजी एमएच तमीम ने गुरुवार को पुष्टि की कि ट्रिब्यूनल ने बुधवार रात को जांच शुरू कर दी है.
76 वर्षीय हसीना अभूतपूर्व सरकार विरोधी छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के बीच अपने पद से इस्तीफा देने के बाद 5 अगस्त को भारत आ गईं. याचिका में हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग और उसके संबद्ध संगठनों का भी नाम है. यह याचिका कक्षा 9 के छात्र आरिफ अहमद सियाम के पिता बुलबुल कबीर ने दायर की थी, जिसकी भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के दौरान हत्या कर दी गई थी.
वकील ने कहा, "(आईसीटी-बीडी) जांच एजेंसी ने आरोपों की समीक्षा शुरू कर दी है. नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप को एक मामले के रूप में दर्ज किया गया है. आवेदन में हसीना और अन्य पर छात्र प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई करने का आरोप लगाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर लोग हताहत हुए और मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ."
ट्रिब्यूनल में पेश किए गए ये सबूत
उन्होंने कहा कि इस जांच के परिणाम की प्रगति ट्रिब्यूनल को सात दिनों के भीतर सूचित की जाएगी, जिसका गठन मूल रूप से 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों के बंगाली भाषी कट्टर सहयोगियों पर मुकदमा चलाने के लिए किया गया था. ट्रिब्यूनल कानून के अनुसार वादी और अन्य गवाहों के अलावा 16 जुलाई से 6 अगस्त तक विभिन्न मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट को आवश्यक दस्तावेज के रूप में पेश किया गया.

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