
पाकिस्तान में सत्ता का नंबर गेम: आखिर क्यों और कितने नंबरों से पिछड़ रहे हैं PM इमरान खान?
AajTak
Pakistan News: पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 28 मार्च को अश्विवास प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाएगी. संभावना जताई जा रही है कि अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने से पहले इमरान खान इस्तीफा दे सकते हैं.
कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) का गेम करीब-करीब ओवर हो गया है. या कहें कि पाकिस्तान की सियासी जमीन पर वो खुद बोल्ड हो गए हैं. अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने से पहले इमरान खान प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. संभावना जताई जा रही है कि पाकिस्तानी संसद में 28 मार्च को वोटिंग हो सकती है.
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इमरान खान को पाकिस्तान के आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने Organisation of Islamic Cooperation कॉन्फ्रेंस के बाद पद छोड़ने को कहा है. ऐसे में इमरान के सामने कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता. 24 सांसदों के बगावती तेवर के साथ इमरान नंबर गेम में पीछे छूट गए. बागी सांसदों पर सुप्रीम कोर्ट से भी मुंह की खानी पड़ी.
दरअसल, विपक्ष सालों से इमरान को गद्दी से हटाने की मुहिम चलाता रहा, लेकिन पहली बार उसे कामयाबी मिलती दिख रही है, क्योंकि इमरान खेमे के करीब दो दर्जन सांसद भी उनसे मुंह मोड़ चुके हैं.
माना जा रहा है विपक्षी खेमे में 200 से ज्यादा सांसद हैं. यही वजह है कि इमरान खान फ्लोर टेस्ट से बच रहे हैं और विपक्ष पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए अपनी उपलब्धियां गिनाने में लगे हैं. पाकिस्तान में सत्ता का नंबर गेम का हाल देखें तो इमरान को पहले 176 सांसदों का समर्थन हासिल था, लेकिन 24 सांसदों के बागी होने के बाद अब इमरान सरकार के साथ 152 सांसद ही खड़े हैं. यानी 342 नेशनल असेंबली में बहुमत का 172 के आंकड़े से इमरान खान काफी पीछे हैं.
यहीं आंकड़े इमरान खान का खेल बिगाड़ रहे हैं. इसका एहसास इमरान खान को भी है यही वजह है कि अब वो अपनी सरकार की पीठ खुद थपथपाकर जनता की सहानुभूति बंटोरने में लगे हैं. यही नहीं, इमरान अपने बयानों में एक तरफ इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं, दूसरी तरफ हर वो हथकंडा अपना रहे हैं जिससे सरकार बच सके. इमरान दलबदल कानून को लाइफ लाइन के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं. साथ ही मुसीबत के दौर में फंसे इमरान ने फिर से OIC कॉन्फ्रेंस में कश्मीर का राग अलाप रहे हैं और धारा 370 को लेकर भारत पर जुबानी हमला कर रहे हैं.
फिलहाल तो देखकर यही लग रहा है कि इमरान खान के सारे हथकंडे फेल हो गये हैं. लेकिन उनकी पार्टी पीटीआई अब लड़ाई सड़क पर लड़ना चाहती है. यही वजह है कि 28 मार्च को फ्लोर टेस्ट से एक दिन पहले इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने अपने 10 लाख समर्थकों को इस्लामाबाद बुलाया है. लेकिन क्या जिस सड़क से इमरान ने सत्ता की कुर्सी पर पहुंचाई थी वहां जाकर वो अपनी कुर्सी बचा पाएंगे. यही सबसे बड़ा सवाल है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के दबाव के खिलाफ डेनमार्क के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें कोपेनहेगन में अमेरिकी दूतावास तक मार्च भी शामिल रहा. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड मुद्दे पर दबाव बढ़ाते हुए डेनमार्क समेत आठ यूरोपीय देशों से आने वाले सामान पर 1 फरवरी से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है.

यूक्रेन पर रूस ने एक ही रात में 200 से अधिक स्ट्राइक ड्रोन दागकर भीषण हमला किया है. इस हमले में सुमी, खार्किव, नीप्रो और ओडेसा सहित कई इलाके निशाने पर रहे, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए हैं. राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इन हमलों के बीच देश की आंतरिक मजबूती और मरम्मत दलों के काम की सराहना की है.

गाजा पुनर्विकास के लिए ट्रंप की शांति योजना के तहत 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों का ऐलान कर दिया गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद उसके अध्यक्ष होंगे. इधर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा संघर्ष समाप्त करने की व्यापक योजना के तहत गाजा के पुनर्विकास के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' में नामित किया गया है. देखें अमेरिकी से जुड़ी बड़ी खबरें.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे. प्रधानमंत्री की अगुवाई में US कॉन्सुलेट तक मार्च निकाला गया. जबकि डेनमार्क और यूरोप ने NATO मौजूदगी बढ़ाने का संकेत दिया है. ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने से जुड़े बयान दिए हैं, जिसके बाद लोगों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है.

अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.







