
पाकिस्तानी पति, बांग्लादेशी पत्नी लेकिन पासपोर्ट हिंदुस्तानी... 10 साल से भारत में छिपे परिवार का भंडाफोड़
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बेंगलुरु पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पति पाकिस्तानी निकला तो पत्नी बांग्लादेशी. लेकिन दोनों के पास पासपोर्ट हिंदुस्तानी मिले हैं. इनमें मुख्य आरोपी का नाम राशिद अली सिद्दीकी है, जो मूल रूप से पाकिस्तान का नागरिक है. इसने बांग्लादेशी आयशा हनीफ नाम की महिला से शादी कर ली थी और इसके बाद वर्ष 2014 में ये सभी लोग बांग्लादेश से घुसपैठ करके पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में आ गए थे और वर्ष 2014 से 2018 के बीच चार वर्षों तक दिल्ली में रहे थे.
पूरी दुनिया में ऐसे 50 से ज्यादा देश हैं, जहां बहुसंख्यक आबादी मुसलमानों की है लेकिन इसके बावजूद इनमें से एक भी देश लेबनान और सीरिया के मुसलमानों को अपने यहां शरण देने के लिए तैयार नहीं है. ना ही कोई मुस्लिम देश गाजा के मुसलमानों को अपनाने के लिए तैयार हैं. लेकिन भारत एक ऐसा धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां ना जाने कितने राज्यों और शहरों में बांग्लादेश से घुसपैठ करके आए मुसलमान अवैध तरीके से रह रहे हैं. भारत की राजनीति भी ऐसी है कि इन लोगों के पास अब हमारे देश का असली आधार कार्ड है, ड्राइविंग लाइसेंस है, पासपोर्ट है और यहां तक कि ये लोग इस देश के वोटर भी बन गए हैं.
बेंगलुरु पुलिस ने ऐसे ही कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पति पाकिस्तानी निकला तो पत्नी बांग्लादेशी. लेकिन दोनों के पास पासपोर्ट हिंदुस्तानी मिले हैं. इनमें मुख्य आरोपी का नाम राशिद अली सिद्दीकी है, जो मूल रूप से पाकिस्तान का नागरिक है. और जांच में पता चला है कि ये व्यक्ति पाकिस्तान में किसी धार्मिक विवाद के बाद अपनी जान बचाकर बांग्लादेश आ गया था, जहां इसने आयशा हनीफ नाम की महिला से शादी कर ली थी और इसके बाद वर्ष 2014 में ये सभी लोग बांग्लादेश से घुसपैठ करके पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में आ गए थे और वर्ष 2014 से 2018 के बीच चार वर्षों तक दिल्ली में रहे थे.
खतरनाक बात ये है कि देश की राजधानी दिल्ली में रहते हुए इन लोगों ने अपने फर्जी दस्तावेज़ों की मदद से असली आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और यहां तक कि वोटर आईडी कार्ड भी बनवा लिया था और ये सारे दस्तावेज भारत में आने के सिर्फ एक साल में बन गए थे और ये लोग यहां हिन्दू बनकर रह रहे थे. इनमें पाकिस्तान का नागरिक राशिद अली सिद्दीकी है जो भारत आकर शंकर शर्मा बन गया, उसकी पत्नी आयशा हनीफ, जो बांग्लादेश की नागरिक है, वो आशा शर्मा बन गई. उसके पिता मोहम्मद हनीफ, राम बाबू शर्मा बन गए, उसकी मां रुबीना, रानी शर्मा बन गई और उसके दोनों बच्चों का भी भारत का आधार कार्ड बन गया था और ये आधार कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस दिल्ली के एक पते पर बनवाया गया था.
इससे आप ये समझ सकते हैं कि अगर राजधानी दिल्ली में जहां संसद भवन है, सुप्रीम कोर्ट है और सारी बड़ी सुरक्षा एजेंसियों के मुख्यालय हैं, अगर वहां इतनी आसानी से घुसपैठ करके आए लोग अपना आधार कार्ड और पासपोर्ट बनवा कर राशिद अली से शंकर शर्मा और आयशा हनीफ से आशा शर्मा बन सकते हैं तो देश के बाकी राज्यों की क्या स्थिति होगी?
पिछले 10 वर्षों से अवैध तरीके से रह रहा था परिवार
ये परिवार पिछले 10 वर्षों से भारत में अवैध तरीके से रह रहा था और 6 साल पहले वर्ष 2018 में दिल्ली से बेंगलुरु शिफ्ट हुआ था. और इसे यहां कोई तकलीफ नहीं थी. राशिद अली, शंकर शर्मा के नाम से अपनी एक बड़ी दुकान चला रहा था और बेंगलुरु में इस परिवार ने एक VILLA किराए पर लिया हुआ था. लेकिन पुलिस का कहना है कि हाल ही में उसे चेन्नई के Immigration Department ने ये जानकारी दी थी कि उसने चार लोगों को फर्जी पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार किया है, जो 14 सितंबर को भारत से बांग्लादेश की राजधानी ढाका गए थे और 24 सितंबर को ढाका से चेन्नई लौटे थे. लेकिन चेन्नई लौटने पर जब इन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ हुई तो ये पता चला कि ये सभी लोग भारत में फर्जी दस्तावेज़ बनाकर अवैध तरीके से उसी परिवार के साथ रह रहे थे, जिसे बेंगलुरु पुलिस ने अब गिरफ्तार किया है. कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने खुद ये बात कही है कि बेंगलुरु में बड़ी संख्या में लोग अवैध तरीके से रह रहे हैं, जिनकी पहचान करके पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है.

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