
पहले रिश्तों में तनाव और अब दोस्ती... पीएम मोदी के दौरे को कैसे देख रहे हैं मालदीव के लोग?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर मालदीव पहुंचे हैं. उनका यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब दोनों देश तनावपूर्ण रिश्ते से निकलकर संबंधों में मिठास लाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. पीएम मोदी के दौरे के लेकर वहां के नेताओं, मीडिया और लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मालदीव दौरा दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है. इसलिए क्योंकि यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब दोनों देश रिश्तों में आए तनाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत का पारंपरिक दोस्त रहे द्वीप देश मालदीव के प्रधानमंत्री मोहम्मद मुइज्जू भारत विरोधी अभियान के तहत सत्ता में आए थे और कई महीनों तक उन्होंने भारत विरोधी रुख अपनाए रखा. लेकिन फिर उनके रुख में नरमी आई और जून 2024 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने तीसरी बार पद की शपथ ली तब समारोह में मुइज्जू भी बतौर अतिथि शामिल हुए.
अब प्रधानमंत्री मोदी मुइज्जू के निमंत्रण पर मालदीव पहुंचे हैं जहां वो स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ समारोह में भी हिस्सा लेंगे.
पीएम मोदी के दो दिवसीय दौरे को लेकर मालदीव में काफी उत्साह है और वहां बेहद ही गर्मजोशी से उनका स्वागत किया गया है. शुक्रवार सुबह पीएम मोदी मालदीव पहुंचे जहां राष्ट्रपति मुइज्जू ने उनका स्वागत किया. इस दौरान मुइज्जू की पूरी कैबिनेट वहीं मौजूद थी जिसमें विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री जैसे बड़े मंत्री शामिल थे.
पीएम मोदी के इस दौरे को लेकर वहां के विपक्षी नेताओं में भी खासा उत्साह है. मुइज्जू ने जब भारत विरोधी रुख अपनाया था तब विपक्षी नेताओं ने उनका भारी विरोध किया था. और जब दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आ रहा है तो विपक्ष के ये नेता बड़े खुश हैं जिसमें मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह भी शामिल हैं.
पीएम मोदी के दौरे को लेकर सोलिह ने एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री का मालदीव आना मालदीव के लोगों के लिए सम्मान की बात है और यह क्षेत्रीय सहयोग के प्रति भारत की ऐतिहासिक प्रतिबद्धता को दिखाता है.
बयान में पूर्व राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को निमंत्रण देने के लिए मुइज्जू को धन्यवाद देते हुए कहा, 'ऐसे समय में मालदीव आने का पीएम मोदी का फैसला दिखाता है कि राजनीतिक मतभेद हमारे देशों के बीच मजबूत और ऐतिहासिक बंधन में रुकावट नहीं बन पाएगा.'

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