
पश्चिम बंगालः मोदी मंत्रिमंडल से दरकिनार, संगठन में उपेक्षा... TMC में ऐसे लौटे अर्जुन सिंह
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अर्जुन सिंह ने बीजेपी छोड़कर टीएमसी का दामन थाम लिया है. अर्जुन सिंह की नाराजगी केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में निशीथ प्रमाणिक और शांतनु ठाकुर को मंत्री बनाए जाने के बाद से ही शुरू हो गई थी.
पश्चिम बंगाल की बैरकपुर लोकसभा सीट से सांसद और ममता बनर्जी के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का सबसे मुखर चेहरा रहे अर्जुन सिंह ने आखिरकार घर वापसी कर ली है. अर्जुन सिंह ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया है. अर्जुन सिंह अब तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. अर्जुन सिंह के बीजेपी छोड़कर टीएमसी में शामिल होने के सियासी मायने क्या हैं, अब इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है.
अर्जुन सिंह के बीजेपी छोड़कर टीएमसी में शामिल होने की अटकलें तो कई महीने पहले, तब से ही लगनी शुरू हो गई थीं जब अर्जुन सिंह ने जूट उद्योग को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को कोसना शुरू कर दिया था. अर्जुन सिंह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रशंसा भी तभी शुरू कर दी थी. आखिर किन वजहों से अर्जुन सिंह ने पार्टी छोड़ी और बीजेपी को इससे क्या नुकसान, टीएमसी को क्या फायदा हुआ? इसकी तह में कई और बातें भी हैं.
पिछले साल शुरू हुई थी नाराजगी
अर्जुन सिंह की बीजेपी से नाराजगी की शुरुआत पिछले साल जुलाई में ही शुरू हो गई थी. बीजेपी ने निशीथ प्रमाणिक और शांतनु ठाकुर को केंद्र में मंत्री बनाया, तभी इस नाराजगी की शुरुआत हो गई थी. सूत्रों की मानें तो अर्जुन सिंह केंद्र में मंत्री बनाए जाने को लेकर काफी आश्वस्त थे और बंगाल बीजेपी में भी कई नेताओं को यकीन था कि अर्जुन सिंह को जरूर मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी.
अर्जुन सिंह को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिली नहीं, उल्टे प्रदेश में भी पार्टी के सांगठनिक कामों में धीरे-धीरे वे दरकिनार किए जाने लगे. पिछले कुछ महीनों में ही पुलिस ने भी अर्जुन सिंह के खिलाफ कई मामले दर्ज कर लिए. बीजेपी में बैरकपुर के बेताज बादशाह की छवि बना लेने वाले अर्जुन सिंह के खिलाफ टीएमसी ने उनके ही इलाके में घेराबंदी तेज कर दी थी.
टीएमसी को ये होगा फायदा

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