
न्यूयॉर्क मेयर पद के उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी की उम्मीदवारी पर विरासत का साया, सोशल मीडिया पर हुई 'नेपो बेबी' की बहस
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न्यूयॉर्क मेयर चुनाव में ज़ोहरान ममदानी की सोशलिस्ट नीतियां और उनके संपन्न परिवार को लेकर विवाद तेज़ हो गया है. आलोचक उनके परिवार की हाई-क्लास लाइफस्टाइल और मैनहैटन में करोड़ों की संपत्ति को लेकर उन्हें
अमेरिका के प्रमुख शहर में से एक न्ययॉर्क में आने वाले चार महीनों में मेयर के चुनाव होने वाले हैं. इस चुनाव में कई सत्तारूढ़ दल के नेता भी मैदान में हैं. इस चुनावी मैदान में भारतीय मूल के ज़ोहरान ममदानी ने सबका अपनी ओर ध्यान खींचा है. उनके सोशलिस्ट विचारधारा ने सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया है. हालांकि, अब आलोचक उनके परिवार के संपत्ति को लेकर सवाल खड़ा कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि ममदानी की विचारधारा (बातें) और सामाजिक वर्ग के लिए आवाज़ उठाना मेल नहीं खा रहे हैं.
ममदानी मशहूर फिल्म डायरेक्टर मीरा नायर और लेखक-प्रोफेसर महमूद ममदानी के बेटे हैं. आलोचकों का कहना है कि ममदानी एक समृद्ध परिवार से आते हैं और उनके द्वारा समाजवाद की बातें करना पाखंड है. मशहूर अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक समूह जैसे MAGA समर्थक लॉरा लूमर और मेघन मैककेन ने ममदानी को 'नेपो बेबी' कहकर तंज कसा है, जो अपने पैरेंट्स की प्रसिद्धी और धन का लाभ उठा रहे हैं.
33 साल के ज़ोहरान ममदानी डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट और न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य हैं. अगर वह आगामी चुनाव में जीत हासिल करते हैं तो वह न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बन जाएंगे, जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं. ममदानी ने अपने भाषण के दौरान कई बार कहा है कि वह अगर चुनाव जीतते हैं तो शहर में आर्थिक असमानता को दूर करेंगे.
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ज़ोहरान ममदानी अपनी संपत्ति को लेकर सुर्खियों में हैं, जिसकी वजह से उनकी उनकी कामकाजी वर्ग की छवि को कम कर रहा है. ममदानी की मां मीरा नायर ने मैनहट्टन के वेस्ट चेल्सी में 1.375 मिलियन डॉलर में एक हाई-एंड लॉफ्ट खरीदा था, जिसे बाद में 1.45 मिलियन डॉलर में बेचा गया. जिसकी वर्तमान में क़ीमत 1.9 मिलियन डॉलर रियल एस्टेट फर्म रेडफिन द्वारा बताई जा रही है.
इसके अलावा, ममदानी के पास युगांडा में चार एकड़ का एक प्लॉट है. जिसकी क़ीमत 150,000 से 250,000 डॉलर है, जिसे उन्होंने 2012 में खरीदा था. ये जानकारी उनके 2024 न्यूयॉर्क विधान नैतिकता आयोग के खुलासे से पता चलता है.

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