
नीतीश कुमार के बेटे निशांत क्या जेडीयू में अपनी पहचान बना पाएंगे?
BBC
सवाल उठ रहे हैं कि क्या निशांत अपने पिता की विरासत को संभाल पाएंगे? नीतीश के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद निशांत की सरकार में क्या भूमिका होगी?
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के यहां इफ़्तार की दावत थी. 19 मार्च की शाम 6 बजे के आस-पास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने कैबिनेट सहयोगी विजय कुमार चौधरी के साथ पहुंचे थे.
महज़ कुछ मिनट रुककर नीतीश वापस लौट गए. नीतीश के वापस लौटने के एक मिनट के भीतर ही निशांत अपनी सफेद गाड़ी में कड़ी सुरक्षा के बीच इस दावत में पहुंचे.
निशांत की गाड़ी जीतन राम मांझी के आवास के अंदर लगी हुई थी. इसके चलते सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय से लेकर सभी नेताओं को अपनी गाड़ी आवास के बाहर छोड़कर पैदल ही इफ़्तार की दावत में शामिल होने आना पड़ा.
इस बीच जब सम्राट चौधरी आए तो कुर्सियां कम पड़ गई. निशांत उनके स्वागत के लिए उठे और एक साधारण सी काली कुर्सी पर बहुत सहज भाव से बैठ गए.
बीती 8 मार्च को जेडीयू में शामिल हुए निशांत कुमार इस वक़्त बिहार की राजनीति का 'मोस्ट वॉच्ड' कैरेक्टर हैं.
ऊपर लिखे वाकये में निशांत की राजनीति में इंट्री को लेकर करीने से बनाई गई 'नीतीश स्ट्रैटेजी' दिखती है. साथ ही नीतीश कैबिनेट के मंत्रियों का निशांत को दिया जा रहा स्पेस और निशांत का सहज–सरल स्वभाव है.
ऐसे में सवाल ये है कि निशांत क्या अपने पिता की विरासत को संभाल पाएंगे? साल 2003 में अस्तित्व में आई जेडीयू और उसकी वैचारिक ज़मीन समाजवाद को बचा पाएंगे और नीतीश के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद निशांत की सरकार में क्या भूमिका होगी?













