
नंबर-3 की पोजीशन पर गौतम गंभीर ने आजमा लिए 5 बल्लेबाज... कब सुलझेगी ये पहेली?
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भारतीय टीम टी20 इंटरनेशनल में अच्छा प्रदर्शन कर रही है. लेकिन प्रयोग लगातार किए जा रहे हैं. आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के मद्देनजर भारतीय टीम को अपना कॉम्बिनेशन दुरुस्त करना होगा. अब भारत को टी20 वर्ल्ड कप से पहले केवल 7 मैच खेलने हैं.
प्रयोग, प्रयोग, प्रयोग... हेड कोच गौतम गंभीर की कोचिंग में ऐसा ही हो रहा है. नतीजे सही आते रहें तो कमजोरियां ढक जाती हैं, लेकिन हार के बाद आलोचनाओं का तूफान उठना लाजिमी है.
भारतीय टीम ने कटक में साउथ अफ्रीका को पूरी तरह पस्त किया, लेकिन मुल्लांपुर टी20 मैच में उसे 51 रनों से हार झेलनी पड़ी. टीम इंडिया ने एक बार फिर पलटवार किया और धर्माशााला में हुए मैच को 7 विकेट से हराया. साउथ अफ्रीका के खिलाफ इन तीनों ही मैचों में एक चीज जो देखने को मिली, वो थी बैटिंग के दौरान नंबर-3 पोजीशन पर बार-बार बदलाव.
इन तीनों ही मैचों में भारतीय टीम ने अलग-अलग बल्लेबाजों को इस पोजीशन पर आजमाया. कप्तान सूर्यकुमार यादव पहले मैच में खुद तीसरे नंबर पर उतरे और 12 रन बना सके. इसके बाद मुल्लांपुर में अक्षर पटेल ने इस नंबर पर मोर्चा संभाला, जिसने सबको चौंका दिया. अक्षर ने 100 की स्ट्राइक रेट से 21 रन बनाए, जो टी20 के लिहाज बेहद धीमी इनिंग्स मानी जाएगी. अब धर्मशाला में तिलक वर्मा को भेजा गया, जिन्होंने नाबाद 25 रन बनाए. हालांकि इसके लिए तिलक ने 34 गेंदें खेलीं.
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टी20 क्रिकेट टॉप ऑर्डर (ओपनिंग और नंबर-3) मैच का रुख तय करते हैं. टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों को नई गेंद संभालनी होती है, पावरप्ले का पूरा फायदा उठाना होता है. लेकिन इस समय टॉप ऑर्डर भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है. शुभमन गिल के बल्ले से रन नहीं निकल रहे हैं. वहीं नंबर-3 की पोजीशन पर जिसे भी आजमयाा जा रहा, वो कुछ खास नहीं कर पा रहा.
गौतम गंभीर के अंडर तीसरे नंबर पर लगातार प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन नतीजे अब तक उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे. हालिया ऑस्ट्रेलिया दौरे से लेकर अब तक नंबर-3 पर 5 बल्लेबाजों को आजमाया गया, मगर कोई भी खुद को स्थायी विकल्प के तौर पर स्थापित नहीं कर सका. सूर्यकुमार यादव ने तीन मैचों में नंबर-3 पर बल्लेबाजी की. वहीं संजू सैमसन, शिवम दुबे, अक्षर पटेल और तिलक वर्मा ने एक-एक मैच में इस पोजीशन पर बल्लेबाजी की. आंकड़ों से साफ है कि हर मैच में एक नई उम्मीद तो जगी, लेकिन कोई भी पारी ऐसी नहीं रही, जिसने टीम मैनेजमेंट को राहत दी हो.

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