
'धर्म के नाम पर पागलपन...', बांग्लादेश में हिंसा पर भड़के बीएनपी नेता, प्रो. यूनुस की सरकार को दी चेतावनी
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बांग्लादेश में कट्टरपंथियों का एक वर्ग सोशल मीडिया के जरिए देश में विभाजन पैदा कर रहा है. उनके निशाने पर अल्पसंख्यक हैं. ये सोशल मीडिया के जरिए तोड़फोड़ और आगजनी को बढ़ावा दे रहे हैं. बांग्लादेश की इस स्थिति पर बीएनपी महासचिव ने चिंता जताई है.
बांग्लादेश की प्रमुख पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बुधवार को देश की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि शेख हसीना सरकार के पतन के तीन महीने ही बीते हैं और बांग्लादेश की सड़कों पर हिंसा भड़क उठी है, लोग एक-दूसरे का खून बहा रहे हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को निशाना बनाकर हमले किए जा रहे हैं.
बांग्लादेश में एक प्रेस क्लब में बोलते हुए शेख हसीना की विपक्षी पार्टी के नेता आलमगीर ने कहा, 'तीन महीने के भीतर ही सड़कों पर झगड़े शुरू हो गए हैं. लोग एक-दूसरे का खून बहा रहे हैं, अखबारों के दफ्तरों को जलाया जा रहा है और उन पर हमले किए जा रहे हैं... क्या यह बलिदानों का नतीजा है?'
'यह कैसा बांग्लादेश है...'
बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के कारण 5 अगस्त को शेख हसीना की सरकार गिर गई थी. आंदोलन के दौरान बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं को निशाना बनाया गया. नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार में भी बांग्लादेश में हिंसा का दौर थम नहीं रहा और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की खबरें आती रही हैं.
देश के इन हालातों का जिक्र करते हुए फखरुल ने पूछा, 'यह कैसा बांग्लादेश है? क्या हम 5 अगस्त से पहले ऐसे देश को जानते थे? आज यह भयानक हिंसा क्यों है? यह अस्थिरता क्यों है? समस्याएं कहां आ रही हैं? मैं ये सवाल आपके सामने रखता हूं.'
उन्होंने कहा कि 5 अगस्त के विद्रोह ने एकजुट होने और सार्थक परिवर्तन लाने का अवसर दिया है. उन्होंने आगे कहा, 'अभी तीन महीने भी नहीं बीते हैं और हमारा असली स्वरूप सामने आने लगा है. इस तरह के व्यवहार से कभी सफलता नहीं मिल सकती. अगर हमारे घर में विभाजन और संघर्ष जारी रहेगा, तो हम कुछ भी ठीक नहीं कर सकते.'

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