
दिल्ली किडनी रैकेट केस में एक और डॉक्टर अरेस्ट, जरूरमंदों से 30 लाख तक वसूलता था गैंग
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पुलिस के मुताबिक, प्रियांश शर्मा ने बरेली के srmsis कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की. उसके बाद प्रियांश दिल्ली में सर्जन के तौर पर काम कर रहा था. प्रियांश ने 2007 से 2013 सैफई में भी काम किया है.
दक्षिणी दिल्ली में किडनी रैकेट के खुलासे के बाद पुलिस को चौंकाने वाली जानकारियां हाथ लग रही हैं. देर शाम पुलिस ने एक और डॉक्टर को रोहिणी इलाके से गिरफ्तार किया है. पकड़े गए डॉक्टर का नाम प्रियांश शर्मा है. ये दिल्ली के नामी अस्पताल में काम करता है. ये पूरा गैंग जरूरतमंदों से 30 लाख रुपए तक वसूला करता था.
पुलिस के मुताबिक, प्रियांश शर्मा ने बरेली के srmsis कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की. उसके बाद प्रियांश दिल्ली में सर्जन के तौर पर काम कर रहा था. प्रियांश ने 2007 से 2013 सैफई में भी काम किया है. ये डॉक्टर किडनी रैकेट के सरगना कुलदीप के साथ मिलकर काम करता था और सोनीपत-गोहाना में अवैध तौर पर किडनी ट्रांस्प्लांट के धंधे में जुड़ा था. बता दें कि इस मामले में दिल्ली पुलिस अब तक कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इसमें दो बड़े अस्तपाल के दो डॉक्टर शामिल हैं.
बताते चलें कि ये लोग हौज खास और आसपास के इलाकों में गरीब लोगों को टारगेट करते थे और उन्हें एक किडनी के बदले ढेरों पैसे देने का वादा करते थे. दूसरी तरफ गैंग के लोग उन लोगों के टच में रहते थे, जिन्हें किडनी की जरूरत होती है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अभी तक जो आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, उनमें से दो डॉक्टर हैं और बाकी टेक्नीशियन और हेल्पर शामिल हैं.
आरोपियों ने हरियाणा के सोनीपत में एक ऑपरेशन थिएटर भी बनाया हुआ था. इसी जगह पर ये लोगों का ऑपरेशन करते और किडनी निकालते थे. इसके बदले में जरूरतमंदों से लाखों रुपये लिए जाते थे. ये गैंग पिछले 6 महीने में 14 लोगों को टारगेट कर चुकी थी. पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल डाटा और दूसरी जानकारियां खंगाल रही है. ये गरीब और मजबूर लोगों को टारगेट करते थे और उन्हें बड़ी रकम का लालच देते थे. पुलिस ने ये भी बताया कि आरोपी सोशल मीडिया के जरिये क्लाइंट तलाशते थे.
किडनी रैकेट की कहानी पीड़ित की जुबानी
गुजरात का रहने वाले रघु की माली हालत ठीक नहीं थी. रोजगार की तलाश में कुछ महीने पहले वह दिल्ली पहुंचा. रघु के मुताबिक उसे रोजगार मिलता, इसके पहले ही किसी ने उसका पर्स और कीमती सामान चोरी कर लिया. इसके बाद रघु नई दिल्ली के गुरुद्वारा पहुंचा. वहां पर वह काम करने लगा और 4 दिन तक वहीं पर रहा. इसी दौरान रघु की मुलाकात राजू नाम के एक शख्स से हुई. राजू जल्द समझ गया कि रघु के पास बिल्कुल पैसे नहीं हैं. इसके बाद राजू ने रघु से कहा कि वह अगर एक किडनी दे देता है तो उसकी सारी समस्याएं हल हो जाएंगी और उसे इतने पैसे मिलेंगे कि उसके सारे काम बन सकते हैं.

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