
दक्षिण एशिया में 'न्यूक्लियर अनहोनी' की आशंका... फिर 3 देशों की राजधानियों में घनघनाने लगीं फोन की घंटियां, इंडिया-पाकिस्तान के बीच कैसे हुआ सीजफायर?
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पहले तो अमेरिका उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस युद्ध में दखल देना मूल रूप से हमारा काम नहीं है. फिर ऐसा क्या हुआ कि 24 घंटे के बाद ही अमेरिका को दक्षिण एशिया में अनहोनी की आशंका सताने लगी. वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद और दिल्ली तक कूटनीतिक गतिविधियां अचानक से तेज हो गई. और तीन देशों की राजधानियों में फोन की घंटियां घनघनाने लगीं.
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारत-पाकिस्तान के बीच की ताजा लड़ाई में दखल देने से इनकार करते हुए 9 मई को ही कहा था कि 'हम युद्ध के बीच में दखल नहीं देने जा रहे हैं, यह मूल रूप से हमारा काम नहीं है.' वेंस का ये बयान ट्रंप प्रशासन के उन नीतियों के अनुकूल ही था जहां ट्रंप किसी और देश के लफड़े से यथासंभव दूरी बनाए रखने में विश्वास करते हैं.
फिर ऐसा क्या हुआ कि 24 घंटे के बाद ही अमेरिका को दक्षिण एशिया में अनहोनी की आशंका सताने लगी. इसके बाद वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद और दिल्ली तक कूटनीतिक गतिविधियां अचानक से तेज हो गई. भारत पाकिस्तान और अमेरिका- तीन देशों की राजधानियों में फोन की घंटिया घनघनाने लगी.
अमेरिका के अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की है. NYT ने अपनी रपट में लिखा है कि उपराष्ट्रपति वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को उसी अनहोनी की आशंका सता रही थी जैसा डर आज से 25 साल पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को सता रहा था. जब करगिल घुसपैठ के दौरान भारत और पाकिस्तान के सेनाएं आमने-सामने खड़ी हो गई थी. ये डर था कि दो पड़ोसियों का युद्ध कहीं परमाणु हमले की शक्ल न ले ले.
22 अप्रैल को पहलगाम में 26 बेगुनाह सैलानियों की आतंकियों के द्वारा हत्या के बाद 7 मई को भारत की जवाबी कार्रवाई से इस युद्ध के फिर से न्यूक्लियर हो जाने का खतरा पैदा हो गया था. अमेरिका की चिंता तो तब और बढ़ गई जब भारत के मिसाइल पाकिस्तान के नूर खान एयर बेस तक पहुंच गए. पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों की देख-रेख करने वाला मुख्यालय नूर खान एयर बेस के आस-पास ही है.
NYT के अनुसार वेंस और रुबियो को कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करने वाली बात यह थी कि पाकिस्तानी और भारतीय वायु सेना के बीच गंभीर हवाई लड़ाई शुरू हो गई थी. पाकिस्तान ने भारत की शक्ति परखने के लिए भारत के हवाई क्षेत्र में 300 से 400 ड्रोन भेजे थे. लेकिन चिंता का सबसे बड़ा कारण शुक्रवार देर रात आया, जब पाकिस्तान के रावलपिंडी में नूर खान एयर बेस पर विस्फोट हुए, जो इस्लामाबाद से सटा हुआ सैन्य अड्डे वाला शहर है. नूर खान एयर बेस से इस्लामाबाद की दूरी मात्र 10 से 15 किलोमीटर है. एक सुपरसोनिक मिसाइल इस दूरी को 3 से 4 या 4 से 5 सेकेंड में तय कर सकता है.
नूर खान एयर बेस पाकिस्तान का एक महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान है. यह पाकिस्तान की सेना का सेंट्रल ट्रांसपोर्ट हब है. यहां से ही पाकिस्तानी विमान हवा में ईंधन भरते हैं. यह केंद्र पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को उड़ान भरने में मदद करता है.

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