
तेजी से घट रहा जर्मन सेना का साइज, क्यों आर्मी में भर्ती से बच रहे युवा, अब क्या रास्ता तलाश रही सरकार?
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लगभग एक दशक बाद एक बार फिर जर्मनी में सैन्य सर्विस पर अनिवार्यता की बात हो रही है. पहले युवाओं को करियर की शुरुआत में कुछ समय आर्मी में देना जरूरी था. ये नियम साल 2011 में बंद हो गया. अब जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने माना कि वे स्कूल पूरा कर चुके लाखों युवाओं को सेना में भर्ती करना चाहते हैं.
जर्मन डिफेंस मिनिस्टर बोरिस पिस्टोरियस काफी मशक्कत कर रहे हैं कि देश में अनिवार्य सैन्य सेवा शुरू हो जाए. कुछ दिनों पहले अपने अमेरिकी दौरे के दौरान मंत्री ने माना कि समय बदल चुका है, और अनिवार्य मिलिट्री सेवा पर रोक लगाना एक गलती थी. दुनिया के कई हिस्सों में फिलहाल युद्ध चल रहा है, जिसकी चिंगारी छिटकते हुए जर्मनी तक भी आ सकती है. इसी डर से सरकार सैनिकों की संख्या बढ़ाना चाह रही है. लेकिन समस्या ये है कि युवा सेना की नौकरी में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे.
क्या कहा जर्मन रक्षा मंत्री ने बोरिस पिस्टोरियस ने जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में कहा कि मुझे यकीन हो चुका है कि जर्मनी को अनिवार्य मिलिट्री सेवा की जरूरत है. समय बदल चुका है.
अभी कितने सैनिक है इस देश के पास इस देश में 1 लाख 80 सैनिक हैं, जो फिलहाल के हालात देखते हुए कम माने जा रहे हैं. सरकार सेना को वॉर-रेडी बनाने की तैयारी में है. मतलब युद्ध की नौबत आने से पहले ही उसके लिए रेडी रहना. इसमें युद्ध की प्रैक्टिस, हथियार, गोले-बारूद रखने के अलावा सैनिकों की संख्या बढ़ाना भी शामिल है.
क्या है सरकार का टारगेट
देश को इसके लिए कम से कम 2 लाख 3 हजार सैनिक चाहिए. इसके साथ ही जरूरी है कि हर साल 20 हजार नए सैनिकों की भर्ती हो सके ताकि छोड़कर जा रहे सैनिकों की जगह खाली न रहे. जर्मनी जीडीपी का 2 फीसदी सेना पर खर्च करने की सोच रही है. साल 2022 में ये 1.39 फीसदी था. यहां तक कि मुख्य विपक्षी दल क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन ने अगले साल चुनाव जीतने पर अनिवार्य सैनिक सेवा लागू करने का वादा किया है. ये सेवा सालभर के लिए होगी, और सेना के अलावा सोशल वर्क में भी हो सकती है.

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