
तुर्की में आज खत्म हो सकता है रेस्क्यू ऑपरेशन, 46 हजार से ज्यादा लोगों के मिल चुके हैं शव
AajTak
तुर्की में भूकंप पीड़ितों के लिए चलाया जा रहा रेस्क्यू ऑपरेशन किसी भी समय बंद किया जा सकता है. दरअसल, इस घटना को अब 12 दिन बीत चुके हैं. इसलिए रेस्क्यू टीम को मलबे के नीचे जीवित बचे लोगों के मिलने की संभावना बेहद कम लग रही है. अब तक तुर्की और सीरिया में 46 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप को 12 दिन बीत चुके हैं. सीरिया और तुर्की में मिलाकर अब तक 46 हजार से ज्यादा लोगों की लाशें बरामद की जा चुकी हैं. पूरे देश में लाशों का ढेर लग गया है. इस बीच अब जानकारी सामने आ रही है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी अलग-अलग टीमें आज रात अभियान बंद कर सकती हैं.
दरअसल, 6 फरवरी को आए भूकंप का आज 13वां दिन है. जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ते जा रहे हैं, उसी तरह मलबे के नीचे दबे लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीदें भी कम होती जा रही हैं. ज्यादातर मलबा हटाने पर रेस्क्यू टीम के सदस्यों को लाशों का अंबार ही नजर आ रहा है. हालांकि, मृतकों का आंकड़ा और ज्यादा बढ़ने की पूरी संभावना है. बताया जा रहा है कि भूकंप में तुर्की के 3 लाख से ज्यादा अपार्टमेंट तहस-नहस हो चुके हैं.
तुर्की के डिजास्टर एंड इमरजेंसी मैनेजमेंट अथॉरिटी के प्रमुख यूनुस सेजर ने कहा है कि रविवार की रात को खोज और बचाव के प्रयास काफी हद तक खत्म हो जाएंगे. क्योंकि अब लोगों के जीवित मिलने की संभावना बेहद कम हो गई है. भूकंप से तुर्की में मरने वालों की संख्या 40,402 है, जबकि पड़ोसी सीरिया में 5,800 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
तुर्की में भूकंप के बाद लोगों में स्वांस संबंधी कई बीमारियां भी सामने आ रही हैं. तुर्की के स्वास्थ्य मंत्री फहार्टिन कोका ने कहा कि आंतों और ऊपरी श्वसन संक्रमण में वृद्धि हुई है, लेकिन मरीजों की संख्या फिलहाल गंभीर स्थिति तक नहीं पहुंची है. 18 फरवरी को किर्गिस्तान के बचावकर्मियों ने अंताक्या शहर में एक इमारत के मलबे से 5 लोगों के एक सीरियाई परिवार को बयाया था. इसमें एक बच्चे समेत 3 लोग जिंदा थे. हालांकि, 2 लोगों की डिहाइड्रेशन के कारण मौत हो गई थी.
बता दें कि तुर्की में भूकंप के झटके 6 फरवरी को महसूस किए गए थे. पहला झटका सुबह 4.17 बजे आया. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.8 मैग्नीट्यूड थी. भूकंप का केंद्र दक्षिणी तुर्की का गाजियांटेप था. इससे पहले की लोग इससे संभल पाते कुछ देर बाद ही भूकंप का एक और झटका आया, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.4 मैग्नीट्यूड थी. भूकंप के झटकों का यह दौर यहीं नहीं रुका. इसके बाद 6.5 तीव्रता का एक और झटका लगा.
भूकंप के इन झटकों ने मालाटया, सनलीउर्फा, ओस्मानिए और दियारबाकिर सहित 11 प्रांतों में तबाही मचा दी. शाम 4 बजे भूकंप का एक और यानी चौथा झटका आया. इस झटके ने ही सबसे ज्यादा तबाही मचाई. इसके ठीक डेढ़ घंटे बाद शाम 5.30 बजे भूकंप का 5वां झटका आया था.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.








