
ड्रम में कंकाल, हड्डी में स्क्रू वॉशर... जब कत्ल से ज्यादा पुलिस इंवेस्टिगेशन रही चर्चा में
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कहानी भारत के केरल में हुए ऐसे हत्याकांड की जिसमें कत्ल से ज्यादा उसकी इंवेस्टिगेशन चर्चा का विषय रही. ये केस भारत के सबसे मुश्किल और पेचीदा मामलों में से एक माना जाता है. क्योंकि इसमें कोई सुराग था ही नहीं, जिसके जरिए कातिल का पता लगाया जा सकता था. तो कैसे ये केस सॉल्व हुआ चलिए जानते हैं...
दिन था 8 जनवरी 2018 का. केरल के एर्नाकुलम में कुंबलम के पास एक नदी के किनारे नीला ड्रम पड़ा था. जो कि कई महीनों से यूं ही वहां पड़ा हुआ था. लोगों ने उस ड्रम पर पहले तो गौर किया नहीं. लेकिन जब उससे बेहद गंदी दुर्गंध आनी शुरू हुई तो वहां से आने-जाने वाले लोगों का ध्यान उस पर जाने लगा. एक दिन कुछ मछुआरों ने सोचा कि क्यों न इस ड्रम को खोलकर देखा जाए कि आखिर इसमें है क्या. लेकिन जैसे ही वे उस ड्रम के पास पहुंचे तो वह दुर्गंध और ज्यादा आने लगी. उन्हें शक हुआ कि हो न हो ये दुर्गंध किसी लाश की है. इसलिए उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी.
मौके पर पहुंची पुलिस ने तुरंत ड्रम को काटना शुरू किया. जैसे ही ड्रम को काटा गया तो देखा कि उसमें कंक्रीट और ईंटें भरी हुईं थी. पुलिस ने फिर लोहे की रोड से उसे तोड़ा तो देखा कि उसमें इंसानी कंकाल पड़ा हुआ था. उसकी बहुत सी हड्डियां गल चुकी थीं. लेकिन कुछ चीजें अभी भी बची हुईं थीं. जैसे खोपड़ी और पैर का हिस्सा आदि. कंक्रीट को और तोड़ा गया तो उसमें एक कपड़े का टुकड़ा, बालों का एक गुच्छा, एक अंडरगार्मेंट, चांदी की चेन और कुछ भारतीय करंसी मिली.
इन सभी चीजों को फॉरेंसिक जांच के लिए एर्नाकुलम के एक मेडिकल कॉलेज में भेज दिया गया. अब डॉक्टर्स के सामने काफी चुनौतियां थीं. उन्हें सबसे पहले ये पता करना था कि ये कंकाल किसी मर्द का है या औरत का. मरने वाले की उम्र क्या था और उसकी मौत का कारण क्या था? इसमें सबसे पहले हड्डियों को रीअरेंज किया गया ताकि उसकी हाइट पता लगाई जा सके. जबड़ों की हड्डियों को रिकंस्ट्रक्ट किया गया, ताकि मरने वाले की उम्र और जेंडर पता किया जा सके. वैसे जो बालों के गुच्छे मिले थे उनसे लग रहा था कि लाश किसी औरत की थी. लेकिन आजकल लड़के भी लंबे बाल रखते हैं इसलिए बालों से पता लगाना थोड़ा मुश्किल था कि ये लड़के की लाश थी या लड़की की.
ऐसे मिली केस की पहली लीड जांच में पता चला कि मरने वाले की हाइट एवरेज थी. फिर जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी तो यह साफ हो गया कि लाश किसी लड़की की थी. जिसकी उम्र 20 से 25 साल के बीच थी. 3 दिन यानि 8 जनवरी से 11 जनवरी 2018 तक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चलती रही. हड्डियों से जितनी भी जानकारी मिलनी थी, लगभग मिल चुकी थी. अब बारी थी बाकी मिली चीजों की जांच करने की. वहीं, पुलिस भी जांच में जुटी हुई थी. तभी उन्हें शक हुआ कि हो न हो ये हत्या नवंबर 2016 से पहले की गई होगी. क्योंकि मरने वाले के पास से जो भारतीय करंसी मिली थी, उनमें तीन 500 के नोट पुराने थे. ये वे नोट थे जो नोटबंदी से पहले इस्तेमाल किए जाते थे.
इंवेस्टिगेशन ऑफिसर भी पड़ गए उलझन में नदी के पास रहने वाले कुछ लोगों ने बताया कि वो लोग ड्र्रम को सितंबर 2016 से देखते आ रहे हैं. उन्हें लगता था कि ये कहीं से बहकर आया होगा. इसलिए किसी ने उस पर इतना ध्यान नहीं दिया. पुलिस को अब तक कुछ जानकारी तो मिल चुकी थी. लेकिन और भी जानकारियां उन्हें चाहिए थीं. इसलिए जांच को और ज्यादा तेजी से बढ़ाया गया. इस केस के इंवेस्टिगेशन ऑफिसर थे सिबी टॉम. टॉम की गिनती उन ऑफिसर्स में गिनी जाती है जो मुश्किल से मुश्किल केसों को आसानी से सुलझा देते हैं. लेकिन जब ये केस उनके पास आया तो पहली बार वो भी उलझन में पड़ गए. क्योंकि इससे पेचीदा केस उन्होंने अपने करियर में कभी नहीं देखा था.
पैर से मिला स्क्रू वॉशर 11 जनवरी 2018 की शाम को सिबी टॉम को एक कॉल आया. ये कॉल पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का था. उन्होंने बताया कि उन्हें पैर की हड्डी से 6.6 सेंटीमीटर स्क्रू वॉशर मिला है. पता नहीं वो आपके केस में काम आएगा या नहीं. हो सकता है विक्टिम का एक्सीडेंट हुआ हो और सर्जरी के समय इसे पैर पर लगाया गया हो. इस पर कुछ लिखा भी हुआ है. लेकिन हमारे पास इतना एडवांस माइक्रोस्कोप नहीं है कि उसमें क्या लिखा है, वो पता लग सके. अगर आप कुछ इंतजाम कर सको तो इसका पता लगाया जा सकता है. सिबी टॉम ने फिर जुगाड़ करके हाई रेजोल्यूशन के कैमरे का इंतजाम कर लिया. फिर इसकी मदद से पता लगाया गया कि स्क्रू वॉशर पर 'Pitkar' लिखा है. इसी के साथ इस प्रोडक्ट का बैच नंबर भी लिखा था.

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