
जिम कार्बेट और दुधवा नेशनल पार्क में दम तोड़ रहे बाघ, छह महीने में 16 की हुई मौत
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उत्तराखंड के जिम कार्बेट में इस साल जनवरी से लेकर अबतक 12 बाघों की मौत हो चुकी है, जबकि यूपी के दुधवा टाइगर रिजर्व में चार बाघों की जान चली गई. इन बाघों की मौत कैसे हुई है इसकी जांच के लिए कमेटी भी बना दी गई है.
बाघ संरक्षण को लेकर आई रिपोर्ट में सामने आया है कि उत्तराखंड के जिम कार्बेट में इस साल जनवरी से लेकर अबतक 12 बाघों की मौत हो चुकी है, जबकि यूपी के दुधवा टाइगर रिजर्व में चार बाघों की जान चली गई. इनमें से बीते तीन हफ्तों में तीन और बीते तीन साल में 10 बाघों की मौत हो चुकी है. दुधवा और कार्बेट में इतने बाघों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है.
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 15 दिनों के भीतर हुई तीन बाघों की मौत के मामले में वन मंत्री अरुण कुमार और प्रमुख सचिन वन एवं पर्यावरण मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है.
दुधवा रेंज के निघासन इलाके में बीते मई महीने में एक बाघ का शव मिला, जबकि जून महीने में मैलानी रेंज के रामपुर ढकैया में एक बाघिन की लाश मिली. बताया गया कि भूख और प्यास से इसकी मौत हुई है इसके कुछ दिन बाद ही किशनपुर सेंचुरी रेंज में बाघ का एक शव तालाब में मिला. बताया गया है कि आपसी संघर्ष की वजह से मौत हुई है.
सबसे पहले 21 अप्रैल को एक नर बाघ की मौत हुई थी. इसकी उम्र डेढ़ से दो साल थी. पोस्टमार्टम से पता चला कि इसने शिकार के दौरान ऐसी हड्डी खा ली जिससे इसके आंत फट गई थी और घायल हालात में मिलने के बावजूद बचाया नहीं जा सका.
दुधवा में बाघ की दूसरी मौत 31 मई को हुई निघासन इलाके में ही हुई. यहां एक 4 साल का नर बाघ मरा हुआ मिला. पोस्टमार्टम से पता चला कि बाघों की आपसी लड़ाई में यह घायल हो गया था जिसकी बाद में मौत हो गई.
तीसरे बाघ की मौत रामपुर ढ़केरिया गांव में हुई. इस बाघ ने कई दिनों से कुछ खाया नहीं था क्योंकि इसके के दांत टूटे हुए थे इसके पंजे और नाखून भी घिस कर टूट गए थे. दुधवा के फील्ड डायरेक्टर और वन विभाग तक जब खबर पहुंची तब तक यह गांव में जीवित भी और गाड़ी आने पर इसने गुस्से में हमला भी किया था लेकिन उसी गांव में वन विभाग की टीम के सामने ही उसने दम तोड़ दिया.

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