
थलपति विजय की आखिरी फिल्म 'जन नायगन' क्यों फंसी? CBFC और मेकर्स के बीच बढ़ा टकराव, कोर्ट ने ये कहा
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CBFC ने दावा किया कि उन्हें काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया जबकि नियमों के अनुसार इसे 4 से 8 हफ्ते तक का समय मिलना चाहिए. कोर्ट अब इस बात पर विचार करेगा कि निचली अदालत में CBFC को उचित सुनवाई का अवसर मिला था या नहीं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.
मद्रास हाईकोर्ट में फिल्म 'जन नायगन' से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आज प्रक्रिया को लेकर अहम सवाल उठे. कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा कि क्या सिर्फ दो दिनों में इस मामले पर फैसला करना सही था और क्या CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था.
CBFC क्या है और फिल्म पर विवाद क्या है?
CBFC यानी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड वो वैधानिक संस्था है जो फिल्मों को सिनेमाघरों में रिलीज से पहले सर्टिफिकेट जारी करती है. किसी भी फिल्म को पब्लिक रिलीज के लिए CBFC से मंजूरी लेना अनिवार्य होता है. बोर्ड ये तय करता है कि फिल्म को U, UA, A या S सर्टिफिकेट मिलेगा या उसमें किसी तरह की कटौती या बदलाव की जरूरत है. वहीं फिल्म जन नायगन जिसका तमिल में अर्थ होता है जनता का नेता, इसके बारे में कहा जा रहा है कि निर्माता पक्ष की ओर से अब तक ये दावा नहीं किया गया है कि फिल्म किसी वास्तविक नेता या सच्ची घटना पर आधारित है या नहीं. खासकर फिल्म का विरोध कंटेंट को लेकर नहीं है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया को लेकर है.
कोर्ट में आज क्या हुआ?
सुनवाई की शुरुआत में हाईकोर्ट की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखा और दोनों पक्षों के वकीलों से पूछा कि उन्हें बहस के लिए कितना समय चाहिए. CBFC और फिल्म निर्माताओं दोनों ने 30-30 मिनट का समय बताया.
इसके बाद CBFC की ओर से पेश एएसजी सुंदरसन ने दलीलें रखनी शुरू कीं. उन्होंने कोर्ट को बताया कि फिल्म निर्माताओं को पहले ही एक आधिकारिक सूचना भेज दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि CBFC का पहले का फैसला फिलहाल होल्ड पर रखा गया है. CBFC के मुताबिक, ये बात खुद निर्माताओं की याचिका में भी दर्ज है कि उन्हें ये जानकारी मिल चुकी थी.

स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्पीकर सभी के होते हैं. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अफसोसजनक है. स्पीकर जब चुने गए थे, तब पक्ष और प्रतिपक्ष, दोनों नेता उनको चेयर तक लेकर गए थे. स्पीकर सभी सदस्यों के हितों के संरक्षक होते हैं, यह संसदीय राजनीति के लिए अफसोसजनक पल है. अमित शाह ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उपस्थिति 17वीं लोकसभा में 51 प्रतिशत रही. 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 80 प्रतिशत रहा.

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि संसद में कौन कितना बोलेगा और क्या बोलेगा, इसका फैसला सत्ताधारी पार्टी नहीं बल्कि स्पीकर करते हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी विपक्ष की आवाज दबाई नहीं है, जबकि वर्तमान में विपक्षी दलों ने उनकी आवाज दबाने की कोशिश की है. उन्होंने 1975 की आपातकाल की घटना का संदर्भ देते हुए कहा कि उस वक्त विपक्ष की आवाज दबाने का काम हुआ था.

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स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में जवाब दिया. अमित शाह ने कहा कि स्पीकर सभी के होते हैं. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अफसोसजनक है. स्पीकर जब चुने गए थे, तब पक्ष और प्रतिपक्ष, दोनों नेता उनको चेयर तक लेकर गए थे. स्पीकर सभी सदस्यों के हितों के संरक्षक होते हैं, यह संसदीय राजनीति के लिए अफसोसजनक पल है.

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