
केसरिया पगड़ी, पंजाबी में भाषण और साल में 35 दौरे... पंजाब में नायब सैनी इतना एक्टिव क्यों हैं?
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पंजाब में नए नेताओं को पार्टी में शामिल कराने से लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर हमले तक, नायब सैनी लगातार सुर्खियों में हैं. बीजेपी के लिए वो एक ऐसे ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के तौर पर देखे जा रहे हैं, जो हरियाणा की सीमाएं पार कर पंजाब में पार्टी की जमीन मजबूत कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, सैनी बीते एक साल में 35 से ज्यादा बार पंजाब का दौरा कर चुके हैं.
2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव पर नजरें टिकाए बीजेपी ने पड़ोसी राज्य में अपनी सियासी गतिविधियां तेज कर दी हैं. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इन दिनों पंजाब में पार्टी का सबसे सक्रिय चेहरा बनकर उभरे हैं. बीते कुछ महीनों में सैनी की पंजाब यात्राएं लगातार बढ़ी हैं और उनके दौरों को 2027 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है.
हरियाणा में 2024 में हैट्रिक जीत के बाद बीजेपी के ‘पोस्टर बॉय’ बने नायब सैनी पिछले करीब एक महीने से पंजाब के लगातार दौरे कर रहे हैं. इन दौरों में वो न सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, बल्कि गांवों-कस्बों में जाकर आम लोगों से भी संवाद कर रहे हैं. सैनी कई मौकों पर केसरिया पगड़ी पहनकर नजर आए हैं और मंच से पंजाबी और देसी हरियाणवी का मिश्रण बोलते दिखे हैं.
बीजेपी का कहना है कि ये सब राजनीति नहीं, बल्कि संगठनात्मक काम का हिस्सा है. खुद सैनी भी खुद को 'साधारण कार्यकर्ता' बताते हैं. उनका कहना है, 'मैं एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता हूं और उसी हैसियत से पंजाब में काम कर रहा हूं.'
हालांकि, सैनी के दौरे पूरी तरह योजनाबद्ध नजर आते हैं. वो गांवों और शहरों के साथ-साथ धार्मिक स्थलों पर भी पहुंच रहे हैं. अब तक वो स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब), आनंदपुर साहिब, माछीवाड़ा के गुरुद्वारा चरण कंवल साहिब और फतेहगढ़ साहिब जैसे प्रमुख गुरुद्वारों में मत्था टेक चुके हैं.
पंजाब में नए नेताओं को पार्टी में शामिल कराने से लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर हमले तक, नायब सैनी लगातार सुर्खियों में हैं. बीजेपी के लिए वो एक ऐसे ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के तौर पर देखे जा रहे हैं, जो हरियाणा की सीमाएं पार कर पंजाब में पार्टी की जमीन मजबूत कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, सैनी बीते एक साल में 35 से ज्यादा बार पंजाब का दौरा कर चुके हैं.
ओबीसी समुदाय से आने वाले नायब सैनी को लेकर ये भी चर्चा है कि उनकी मां कुलवंत कौर सिख हैं और परिवार में एक पुरुष सदस्य के सिख धर्म अपनाने की परंपरा रही है. बीजेपी इस सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी पंजाब में अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है. मग्घी मेले जैसे बड़े धार्मिक-राजनीतिक आयोजनों में उनकी मौजूदगी को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

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