
होटल में रखने से नाराज हुए शिवसेना शिंदे गुट के पार्षद, पार्टी ने जीत का प्रमाण पत्र अपने कब्जे में लिया
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मुंबई में शिंदे गुट की शिवसेना के नवनिर्वाचित पार्षद 7-स्टार होटल में रखे जाने से नाराज हो गए हैं. पार्टी द्वारा उनके मूल दस्तावेज अपने पास रखने के फैसले के बाद पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हो रहे हैं.
मुंबई महानगरपालिका में सत्ता गठन को लेकर चल रही सियासी उठापटक के बीच शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नवनिर्वाचित पार्षदों ने बांद्रा स्थित सात सितारा होटल छोड़ना शुरू कर दिया है. पार्टी ने अपने 29 नवनिर्वाचित पार्षदों के सभी मूल दस्तावेज अपने पास रखने का फैसला किया है, जिसके बाद पार्षद अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए रवाना हो रहे हैं.
पार्टी द्वारा जिन दस्तावेजों को अपने पास रखा गया है, उनमें मतगणना के बाद 16 जनवरी को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जारी जीत का प्रमाण पत्र और सभी पार्षदों के आधार कार्ड शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक, 17 जनवरी से होटल में ठहराए गए पार्षद इस व्यवस्था से असहज महसूस कर रहे थे. वे न तो अपनी जीत का जश्न अपने मतदाताओं के साथ मना पा रहे थे और न ही अपने क्षेत्रों में जा पा रहे थे.
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दरअसल, पार्टी ने 'गट' यानी समूह गठन को प्राथमिकता देते हुए सभी पार्षदों को एक साथ होटल में रहने का निर्देश दिया था. नगर निगम कानून के तहत गट गठन से पहले पार्षद पार्टी बदल सकते हैं, लेकिन गट बनने के बाद दलबदल पर रोक लग जाती है. इसके बाद केवल एक-तिहाई पार्षदों के अलग होने की स्थिति में ही विभाजन संभव होता है. इसी वजह से शिंदे गुट गट गठन को जल्द से जल्द पूरा करना चाहता था.
शिव सेना ने गट गठबंधन की प्रक्रिया टाली
हालांकि, अब पार्टी ने गट गठन की प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया है. शिवसेना के महासचिव और पूर्व सांसद राहुल शेवाले दिल्ली रवाना हो रहे हैं, जहां वे वरिष्ठ भाजपा नेताओं से गठबंधन और विभिन्न नगर निगमों में मेयर पद के उम्मीदवारों को लेकर बातचीत करेंगे.

स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्पीकर सभी के होते हैं. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अफसोसजनक है. स्पीकर जब चुने गए थे, तब पक्ष और प्रतिपक्ष, दोनों नेता उनको चेयर तक लेकर गए थे. स्पीकर सभी सदस्यों के हितों के संरक्षक होते हैं, यह संसदीय राजनीति के लिए अफसोसजनक पल है. अमित शाह ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उपस्थिति 17वीं लोकसभा में 51 प्रतिशत रही. 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 80 प्रतिशत रहा.

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि संसद में कौन कितना बोलेगा और क्या बोलेगा, इसका फैसला सत्ताधारी पार्टी नहीं बल्कि स्पीकर करते हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी विपक्ष की आवाज दबाई नहीं है, जबकि वर्तमान में विपक्षी दलों ने उनकी आवाज दबाने की कोशिश की है. उन्होंने 1975 की आपातकाल की घटना का संदर्भ देते हुए कहा कि उस वक्त विपक्ष की आवाज दबाने का काम हुआ था.

बड़े होटलों के अलावा छोटे दुकानदार भी एलपीजी की कमी से गंभीर रूप से प्रभावित हैं. चंडीगढ़ में साइकिल पर छोले-कुलचे बेचने वाले विक्रेता ने बताया कि गैस की आपूर्ति न होने के कारण उन्हें रोज़मर्रा की कमाई में दिक्कत हो रही है. उनका स्टॉक केवल आज तक चलने वाला बचा है और अगर समस्या इसी तरह बनी रही तो उनका व्यापार या तो ठप हो सकता है या फिर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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