
जसोरेश्वरी, भवानी, जयंती... जल रहे बांग्लादेश में देवी दुर्गा के सात शक्तिपीठ भी खतरे में हैं
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बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और सांस्कृतिक ह्रास के बीच प्राचीन हिंदू शक्तिपीठों को गंभीर खतरा है. जेसोरेश्वरी, सुगंधा, भवानी, जयंती, महालक्ष्मी, अपर्णा और स्रवानी शक्तिपीठ जैसे पवित्र स्थल यहां की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण अंग हैं.
चरमपंथ की आग में जल रहे बांग्लादेश में जहां एक तरफ लोकतंत्र की हत्या हो चुकी है तो इसी के साथ यहां संस्कृति और परंपराओं के भी क्षत-विक्षत शव पड़े हैं. बीते सालभर से बांग्लादेश में जिस तरह की अस्थिरता लगातार बनी हुई है और सामान्य जनजीवन बहाली की कोई आशा अभी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है, ऐसे में कभी भारत का हिस्सा रहे और बंगाली संस्कृति के अभिन्न अंग रहे इस देश में सनातन के बचने की उम्मीद भी कम ही नजर आती है.
कभी बंगाल का ही हिस्सा रहे बांग्लादेश में सनातन की शाक्त परंपरा का ही असर रहा था. इसलिए यहां देवी सती के गिरे अंग के कारण कई सिद्ध शक्तिपीठों की स्थापना हुई थी और लंबे समय तक इनकी मान्यता रही है. इन शक्तिपीठों में जयंती, सुगंधा और अपर्णा शक्तिपीठ प्रमुख हैं. इसके अलावा भी चार ऐसे शक्तिपीठ हैं जो तंत्र परंपरा और सिद्धियों के लिए तप क्षेत्र माने जाते हैं. सप्तशती के अलावा तंत्र चूड़ामणि जैसे ग्रंथों में भी इनका उल्लेख है.
भारत के विभाजन के साथ पाकिस्तान का हिस्सा बने और फिर बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र देश बनने के बाद भी भले ये पड़ोसी देश अपनी मुस्लिम पहचान के साथ जाना जाता रहा है, बावजूद यहां शाक्त परंपरा के चिह्न अभी तक बाकी ही थे, जिनको संरक्षण मिलता रहा था. हालांकि कुछ छिटपुट विरोध भी होते आए थे, जिससे इनके अस्तित्व पर संकट मंडराया फिर भी हालात उतने बदतर नहीं हुए जितने की पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के रहे.
...लेकिन अब जब बांग्लादेश में खुले आम बंगाली संस्कृति, अस्मिता, संगीत, कला और परंपरा को नष्ट किए जाने की होड़ जारी है तो ऐसे में ये सिद्ध शक्तिपीठ भी खतरे में आ गए हैं. दुर्गासप्तशती में देवी के जो 108 नाम बताए गए हैं, यह शक्ति पीठ उन्हीं नामों पर स्थापित हैं. यहां सुगंधा शक्तिपीठ, जसोरेश्वरी शक्तिपीठ, भवानी शक्तिपीठ, जयंती शक्तिपीठ, महालक्ष्मी शक्तिपीठ, अपर्णा शक्तिपीठ और स्त्रावनी शक्तिपीठ हैं. किस शक्तिपीठ की क्या है मान्यता, इस पर डालते हैं एक नजर-
जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ - सतखिरा
जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ जिसे शुद्ध रूप में ज्येष्ठोरेश्वरी या ज्येष्ठा काली मंदिर कहा जाता है. यह बांग्लादेश में प्राचीन हिंदू मंदिर है, जो देवी काली को समर्पित है. यह मंदिर सतखिरा के श्यामनगर उपजिले के एक गांव ईश्वरपुर में है और 51 शक्तिपीठों में से एक है, मान्यता है कि यहां देवी सती की हथेलियां गिरी थीं. जेसोरेस्वरी" नाम का अर्थ है "जेशोर की देवी". प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में इस मंदिर का दौरा किया था और मां की मूर्ति के लिए एक सोने का मुकुट भेंट किया था, लेकिन साल 2024 के बांग्लादेश में हिंदू-विरोधी हिंसा के दौरान यह चोरी हो गया.

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