
पहले डिफेंस पैक्ट और अब मुनीर को दे दिया सर्वोच्च सम्मान! क्राउस प्रिंस MBS पाकिस्तान पर इतने मेहरबान क्यों है?
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सऊदी अरब ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को किंग अब्दुलअजीज मेडल ऑफ द फर्स्ट क्लास का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान दिया है. इस सम्मान से पहले दोनों देशों ने रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा.
सऊदी अरब ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान दिया है. पाकिस्तानी सेना ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच गहराते संबंधों का प्रतीक है. फील्ड मार्शल बनने के बाद मुनीर इस्लामिक देश के दौरे पर गए हैं जहां सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज ने उन्हें यह सम्मान दिया है.
सऊदी अरब की न्यूज एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक, मुनीर को सऊदी अरब का सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार 'किंग अब्दुलअजीज मेडल ऑफ द फर्स्ट क्लास' मिला है. सऊदी गजट की रिपोर्ट के मुताबिक, मेडल पांच स्तरों का होता है- एक्सीलेंस, फर्स्ट, सेकंड, थर्ड और फॉर्थ क्लास. सऊदी मीडिया के मुताबिक, मुनीर को द्वितीय स्तर का मेडल मिला है.
मुनीर को यह सम्मान सऊदी किंग सलमान के निर्देश पर रविवार को दिया गया. पाकिस्तान आर्मी चीफ को यह सम्मान ऐसे समय में मिला है, जब कुछ महीने पहले सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ नेटो जैसे रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि दोनों में से किसी एक देश पर अगर हमला होता है तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दोनों देश मिलकर उसका सामना करेंगे.
सितंबर में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा था कि नए रक्षा समझौते के तहत जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम सऊदी अरब को 'उपलब्ध कराया जाएगा.'
पाकिस्तान के वास्तविक शासक माने जाने वाले आसिम मुनीर ने संविधान में बदलाव कर खुद को बेतहाशा ताकत दे दी है. मुनीर अब चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बन गए हैं. इस पद का गठन मुनीर के लिए ही किया गया है जिसका मकसद थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है.
पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ आर्थिक, धार्मिक और सुरक्षा संबंधों को और बेहतर करना चाहता है. उसकी बदहाल अर्थव्यवस्था को कई बार कर्ज देकर सऊदी अरब ने संभाला है.

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