
ट्रंप ने दबाया अमेरिकी डिप्लोमेसी का Reset बटन, 30 देशों में तैनात राजदूतों को बुलाया वापस
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ट्रंप प्रशासन ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे के तहत दुनिया भर में तैनात करीब 30 अमेरिकी राजदूतों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू की है. इनमें अफ्रीका और एशिया के सबसे ज्यादा देश शामिल हैं.
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर में तैनात करीब 30 अमेरिकी राजदूतों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम अमेरिकी कूटनीति को राष्ट्रपति ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे के अनुरूप ढालने के लिए उठाया गया है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन राजदूतों को बर्खास्त नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें अमेरिकी विदेश विभाग (स्टेट डिपार्टमेंट) के भीतर अन्य जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी.
यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फॉक्स न्यूज से कहा, 'यह किसी भी प्रशासन में एक सामान्य प्रक्रिया है. राजदूत राष्ट्रपति का व्यक्तिगत प्रतिनिधि होता है और यह राष्ट्रपति का अधिकार है कि वह सुनिश्चित करें कि विदेशों में तैनात प्रतिनिधि अमेरिका फर्स्ट एजेंडे को आगे बढ़ाएं.' स्टेट डिपार्टमेंट के दो अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 29 देशों में तैनात मिशन प्रमुखों को पिछले सप्ताह सूचित कर दिया गया था कि उनका कार्यकाल जनवरी में समाप्त हो जाएगा.
विदेशों से वापस बुलाए जा रहे अधिकांश राजदूत कैरियर फॉरेन सर्विस अधिकारी हैं, जिन्हें बाइडन प्रशासन के दौरान नियुक्त किया गया था और जो ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पहले दौर के फेरबदल से बच गए थे. हालांकि, पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस से नोटिस जारी होने के बाद उनके जल्द लौटने के संकेत मिल गए थे.
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अफ्रीका और एशिया सबसे ज्यादा प्रभावित
इस फेरबदल का सबसे ज्यादा असर अफ्रीका पर पड़ा है, जहां नाइजीरिया, सेनेगल, रवांडा, युगांडा, सोमालिया और मेडागास्कर समेत 13 देशों से अमेरिकी राजदूतों को वापस बुलाया गया है. एशिया में फिजी, लाओस, मार्शल आइलैंड्स, पापुआ न्यू गिनी, फिलीपींस और वियतनाम सहित छह देशों में तैनात अपने राजदूतों को अमेरिका ने वापस बुलाया है. यूरोप के चार देशों- आर्मेनिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, मोंटेनेग्रो और स्लोवाकिया से भी अमेरिकी राजदूतों को ट्रंप प्रशासन ने वापस आने को कहा है. इसके अलावा मध्य पूर्व में अल्जीरिया और मिस्र, दक्षिण और मध्य एशिया में नेपाल और श्रीलंका, ग्वाटेमाला और सूरीनाम के भी अमेरिकी राजदूत वापस लौटेंगे.

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वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.








