
जम्मू अटैक: एयर बेस के करीब से लॉन्च किए गए थे ड्रोन, जानिए क्या था आतंकियों का मकसद
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आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को इस बात संदेह है कि आतंकियों ने एयर बेस के काफी करीब से ही ड्रोन को लॉन्च किया था. अब ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि आतंकियों के द्वारा इस्तेमाल में लाए गए ड्रोन काफी छोटे थे, ऐसे में हमला करने के लिए उनका ज्यादा पास जाना जरूरी था.
पांच मिनट के अंतराल पर हुए दो धमाकों ने जम्मू एयरफोर्स स्टेशन की सुरक्षा को लेकर सभी को चिंता में डाल दिया है. शुरुआती जांच में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा. अब इंडिया टुडे/ आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक ड्रोन के जरिए किए गए इस हमले को काफी करीब से किया गया था. कहा गया है कि ड्रोन को हवाई अड्डे के करीब से ही लॉन्च किया गया था. कहा जा रहा है कि आतंकियों का मकसद हेलीकॉप्टरों को नुकसान पहुंचाने का था.
जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में ऑपरेशन त्राशी-1 के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकियों की छिपने की जगह का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है. यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तहत किया गया जिसमें आतंकियों को पकड़ने और उन्हें मार गिराने के उद्देश्य से सुरक्षा बल सक्रिय थे. इस अभियान में आतंकियों के छिपने के स्थान का पता चलने से इलाके में सुरक्षा अभी और सख्त हो गई है.

प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद के दावे पर नोटिस जारी किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2022 के आदेशों का हवाला दिया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि नोटिस सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है और उन्होंने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

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