
चुनाव चिन्ह विवाद पर उद्धव के आरोपों को EC ने बताया निराधार, SC में दी ये दलील
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उद्धव ठाकरे के पक्षपात वाले आरोप पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील दी है. सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने कहा कि एकनाथ शिंदे को चुनाव चिन्ह कानून के हिसाब से दिया गया था. शिंदे के पास चुनाव चिन्ह जाना उचित था. उद्धव जो आरोप लगा रहे हैं कि फैसला लेते वक्त हम निष्पक्ष नहीं थे, ये बात निराधार है.
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना का एकनाथ शिंदे के पास चले जाना एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम रहा. इस एक फैसले ने उद्धव ठाकरे की सियासी पारी पर बड़ा डेंट लगा दिया. अब फैसला क्योंकि चुनाव आयोग ने सुनाया, ऐसे में उद्धव के निशाने पर भी वही संस्थान रही. उन्होंने चुनाव चिन्ह विवाद में ईसी पर पक्षपात करने का आरोप लगा दिया. अब सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे के जरिए चुनाव आयोग ने उद्धव के तमाम आरोपों को निराधार बताया है.
चुनाव आयोग ने उद्धव के आरोपों पर क्या बोला?
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने कहा कि एकनाथ शिंदे को चुनाव चिन्ह कानून के हिसाब से दिया गया था. शिंदे के पास चुनाव चिन्ह जाना उचित था. उद्धव जो आरोप लगा रहे हैं कि फैसला लेते वक्त हम निष्पक्ष नहीं थे, ये बात निराधार है. संवैधानिक स्तर पर ये फैसला हुआ है, प्रशासनिक स्तर पर नहीं. चुनाव आयोग ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस मामले में उन्हें बतौर एक पार्टी कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता है. जानकारी के लिए बता दें कि अपने 78 पेज के फैसले में निर्वाचन आयोग ने कहा था कि विधान मंडल के सदन से लेकर संगठन तक में बहुमत शिंदे गुट के ही पास दिखा है. आयोग के सामने दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे और उनकी पुष्टि के लिए दस्तावेज प्रस्तुत किए थे. एकनाथ शिंदे गुट के पास एकीकृत शिवसेना के टिकट पर जीत कर आए कुल 55 विजयी विधायकों में से 40 आमदार यानी विधायक थे. पार्टी में कुल 47,82,440 वोटों में से 76 फीसदी यानी 36,57,327 वोटों के दस्तावेज शिंदे गुट ने अपने पक्ष में पेश कर दिए थे. इसी वजह से चुनाव आयोग ने शिंदे गुट के पक्ष में फैसला सुनाया.
उद्धव ने क्या बोला था?
लेकिन इस फैसले से उद्धव ठाकरे नाराज थे और उन्होंने इसे पक्षपात बता दिया था. उन्होंने कहा था कि ये लोकतंत्र की हत्या है. चुनाव आयोग बीजेपी का गुलाम बन गया है. किस तरह के चुनाव आयोग चीफ का चयन होता है, इसे बदलने की जरूरत है. लोकतंत्र को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आखिरी उम्मीद है. चुनाव आयोग के फैसले ने बता दिया है कि जल्द ही बीएमसी के चुनाव हो सकते हैं. बीजेपी हर कीमत पर इस चुनाव को जीतना चाहती थी. उसे पता है कि यहां पर नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव नहीं जीता जाता है.
महाराष्ट्र में क्या है ये सियासी ड्रामा?

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