
चीन से तनातनी के बीच Hsinchu Airbase ताइवान के लिए क्यों है अहम, देखें ग्राउंड रिपोर्ट
AajTak
अमेरिका नेता नैंसी पेलोसी ने पिछले महीने ताइवान का दौरा किया था. दौरे के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर ताइवान के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है. चीन और ताइवान के बीच युद्ध की आशंका से दुनिया सहमी हुई है. ऐसा कहा जा रहा है कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो सबसे पहले उस द्वीप को निशाना बनाया जाएगा, जिसे तीन बार हमला करने के बावजूद चीन कभी जीत नहीं सका.
चीन और ताइवान के रिश्ते तल्ख होते जा हैं. चीन लगातार ताइवान की घेराबंदी कर रहा है. साउथ और नॉर्थ चाइना सी में वह सैन्य अभ्यास भी कर रहा है. चीन अपने फाइटर जेट ताइवान की सीमा में भेजकर उसे डरा भी रहा है. हालांकि ताइवान सरकार अलर्ट पर है. उसने भी हमले जैसी स्थितियों का सामने करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है. ऐसे हालात के बीच ताइवान के Hsinchu air base की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है.
ताइवान पहुंचीं आजतक की रिपोर्टर ने बताया कि ताइवान की एयरपोर्स के पास मौजूदा समय में सात टैक्टिकल्स फाइटर विंग्स हैं, जिनमें से लड़ाकू विमान F16, FCK1, F5E, मिराज 2000 शामिल हैं. ये विमान Hsinchu air base से ऑपरेट होते हैं. यह एयरबेस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में ताइवान के लिए Hsinchu air base पर बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है.
चीन के तेवर को देखते हुए 2020 में ताइवान की सरकार ने इस एयरबेस को रिपेयर कर लिया था. ताइवान के एयर सिक्योरिटी सिस्टम पर नजर रखने के लिए इसी एयरबेस से फिराज 2000 उड़ाने भरते हैं. यह एयरबेस चीन में सिर्फ 9 किमी. दूर है. ऐसे में अगर चीन मात्सु द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश करता या किनमेन मात्सु द्वीप को ब्लॉक करने की कोशिश करता है तो Hsinchu air base क्रिटिकल हो जाएगा क्योंकि मात्सु द्वीप को बचाने के लिए इसी एयरबेस से लड़ाकू विमान उड़ान भरेंगे.
ताइवान ने बढ़ाया अपना रक्षा बजट
चीन के साथ तनाव के बीच ही ताइवान ने अपना रक्षा बजट बढ़ा दिया है. ताइवान ने साल 2023 के लिए रक्षा बजट में 13.9 फीसदी का इजाफा किया है. यह अब 17.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. निक्केई एशिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित बजट में 108.3 न्यू ताइवान डॉलर नए एडवांस्ड जेट, समुद्री सुरक्षा और हवाई युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए रखे गए हैं. कुल रक्षा बजट 586.3 न्यू ताइवान डॉलर (NTD) तक पहुंच गया है. इस बजट को पास होने के लिए संसद में भेजा जाएगा जिसका सत्र अगले महीने से शुरू हो रहा है.
चीन से बस दो किमी दूर है किनमेन द्वीप

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.





