
गरीबी, डर और जिम्मेदारियां... रिंकू सिंह के पिता क्यों नहीं चाहते थे बेटा क्रिकेटर बने? सिलेंडर ढोने वाले खानचंद्र की मार्मिक कहानी
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रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह का आज (27 फरवरी) सुबह 5 बजे ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में निधन हो गया. वह लिवर कैंसर से जूझ रहे थे. अलीगढ़ के एक सामान्य परिवार से आने वाले रिंकू के पिता उनके क्रिकेटर बनने के बाद भी एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई करते रहे. रिंकू आज जिस मुकाम पर रहे, उसमें उनके पिता का भी अहम योगदान रहा.
टीम इंडिया के क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह का आज (27 फरवरी) सुबह 5 बजे ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में निधन हो गया . यथार्थ हॉस्पिटल के पीआरओ ने समाचार एजेंसी ANI को इस बात की जानकारी दी. रिंकू के पिता चौथे स्टेज के कैंसर से जूझ रहे थे.
रिंकू सिंह इस समय टीम इंडिया के साथ टी20 वर्ल्ड कप खेलने वाली टीम का हिस्सा हैं. वो जिम्बाब्वे संग 26 फरवरी को हुए मुकाबले से पहले भी अपने पिता से मिलने ग्रेटर नोएडा आए थे, बाद में वो टीम से जुड़ गए , लेकिन 27 फरवरी की सुबह उनके लिए मनहूस रही, जब उनके पिता का निधन हो गया और उन पर दुखों का पहाड़ टूट गया.
रिंकू के पिता करते थे गैस सिलेंडर की सप्लाईआईपीएल 2023 में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए रिंकू सिंह ने गुजरात टाइटंस (GT) के खिलाफ आखिरी ओवर में लगातार 5 छक्के लगाकर जीत दिलाई थी. 9 अप्रैल 2023 को अहमदाबाद में रिंकू ने यश दयाल की अंतिम 5 गेंदों पर छक्के मारकर 29 रनों का टारगेट पूरा किया था और 21 गेंदों में 48* रन बनाए थे. उस तारीख के बाद रिंकू की जिंदगी बदल गई थी. उसके बाद उनकी जिंंदगी में शोहरत, नाम, पैसा और सब जुड़ गया.
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक साधारण परिवार में जन्मे 28 साल के रिंकू के पिता खानचंद्र एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी का काम करते थे. वे घर-घर जाकर कंधों पर और छोटे वाहन से भारी सिलेंडर पहुंचाते थे. खास बात यह रही कि जब रिंकू क्रिकेट में एक बड़ा नाम बन गए, तब भी वो अपने काम से जुड़े रहे. उन्होंने ऐसा नहीं सोचा कि बेटा क्रिकेटर बन गया तो वो काम छोड़ दें.
रिंकू को बचपन से क्रिकेट का शौक था, लेकिन पिता शुरू में इसके खिलाफ थे क्योंकि वे चाहते थे कि बेटा पढ़ाई करे या कोई ऐसा काम करे, ताकि सिलेंडर ढोने जैसी मेहनत न करनी पड़े. क्योंकि क्रिकेट में ऐसी कोई गारंटी नहीं थी कि बेटा सफल ही हो जाएगा.
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