
कोई सालों से बैठा नहीं, किसी के सिर पर 45 किलो रुद्राक्ष... महाकुंभ में हठयोगी बाबाओं के निराले अंदाज
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महाकुंभ 2025 में आए महाकाल गिरी अद्भुत हठयोगी को 9 साल पूरे हो चुके हैं और उनकी सिद्धि को 12 साल का समय और लगना है, लेकिन अब वह आजीवन अपना एक हाथ ऊपर करके रखेंगे. इसी तरह गीतानंद गिरी महाराज अपने सिर पर 45 किलो का रुद्राक्ष रखकर पहुंचे हैं. दूसरी ओर खड़ेश्वर महाराज हैं, जो सालों से अपने एक पैर पर खड़े हुए हुए हैं. ना तो वह लेटते हैं और ना ही बैठते हैं.
Mahakumbh 2025: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ 2025 मेले का आगाज हो चुका है. इस मेले में देशभर से श्रद्धालु गंगा स्नान करने के लिए पहुंच रहे हैं. इसके साथ ही, दूर-दूर से साधु भी यहां आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. कुंभ मेले में आए साधुओं का जीवन और उनकी तपस्या सभी को आकर्षित कर रही है. महाकुंभ के अखाड़ों में एक से बढ़कर एक हठयोगी पहुंच चुके हैं और अपनी धूनी रमा रहे हैं.
आज तक की टीम ने महाकुंभ में पहुंचे बाबाओं से बातचीत की और देखा कि इन बाबाओं की तपस्या इतनी कठिन और चुनौतीपूर्ण है कि हर एक साधु ने किसी न किसी प्रकार का कठिन अभ्यास या बलिदान किया है. उनकी साधना और जीवन की कठिनाइयां उनके समर्पण को दर्शाती हैं.
महाकाल गिरी अद्भुत
सबसे पहले महाकुंभ में पहुंचे इन हठयोगी बाबा से मिलिए, जिन्होंने पिछले 9 सालों से अपना बायां हाथ उठाकर रखा हुआ है. अपने बाएं हाथ को यह बाबा धर्म की ध्वजा मानते हैं, जो हमेशा ऊपर की ओर रहता है. इनके बाएं हाथ में अब लकड़ी जैसी अकड़न आ गई है और नाखून ऑक्टोपस के जैसे टेढ़े-मेढ़े हो गए हैं, जिससे अब उस हाथ में कोई जान नहीं बची है. ये बाबा आवाहन अखाड़े से हैं और गौ माता के प्रति अपनी श्रद्धा और गोहत्या विरोधी अभियान को अपनी वजह मानते हैं. उनका कहना है कि जब तक गौ माता पर अत्याचार होते रहेंगे, तब तक वह इसी हठयोग को जारी रखेंगे.
खड़ेश्वर महाराज

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